सोशल मीडिया पर इन दिनों एक शख्स की करीब 35 साल पुरानी कहानी तेजी से वायरल हो रही है। कहानी ऐसी है, जिसे सुनकर शायद कई लोग हैरान रह जाएं। दरअसल, साल 1991 में एक व्यक्ति को विदेश यात्रा का ऐसा मौका मिला, जिसे वह अपनी जिंदगी का खास अनुभव मानता था। लेकिन जब उसने इस यात्रा के लिए अपने बॉस से करीब पांच सप्ताह की छुट्टी मांगी तो उसे मंजूरी नहीं मिली। इसके बाद उसने नौकरी छोड़ने का फैसला कर लिया और अपने सपने को पूरा करने के लिए ब्राजील की यात्रा पर निकल पड़ा।
एक खास यात्रा का मिला मौका
वायरल वीडियो में अतुल निगम नाम के व्यक्ति ने अपनी पुरानी कहानी साझा की है। उन्होंने बताया कि वह रोटरी के ग्रुप स्टडी एक्सचेंज कार्यक्रम के लिए आवेदन कर चुके थे। पहली कोशिश में उनका चयन नहीं हुआ, लेकिन दूसरी बार उन्हें इस कार्यक्रम में शामिल होने का मौका मिल गया।
यह उनके लिए बेहद खास अवसर था, क्योंकि कार्यक्रम के तहत उन्हें करीब पांच सप्ताह विदेश में बिताने थे। पहले एक सप्ताह लंदन में रहकर पुर्तगाली भाषा सीखनी थी। इसके बाद चार सप्ताह ब्राजील के अलग-अलग परिवारों के साथ रहकर वहां की संस्कृति, जीवनशैली और लोगों को करीब से समझना था।
इस यात्रा का अधिकांश खर्च कार्यक्रम की ओर से उठाया जाना था। यानी उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती यात्रा का खर्च नहीं, बल्कि नौकरी से लंबी छुट्टी लेना थी।
बॉस ने छुट्टी देने से कर दिया इनकार
अतुल निगम के मुताबिक, जब उन्होंने अपने बॉस से पांच सप्ताह की छुट्टी मांगी तो उन्हें अनुमति नहीं मिली। उस समय उनके सामने मुश्किल फैसला था। एक तरफ सुरक्षित नौकरी थी और दूसरी तरफ ऐसा अवसर, जो शायद दोबारा कभी नहीं मिलता।
उन्होंने बताया कि उस समय उनकी आर्थिक स्थिति भी ऐसी नहीं थी कि नौकरी छोड़ना आसान फैसला हो। उनके ऊपर घर का लोन था और परिवार में दो छोटे बच्चे भी थे। इसके बावजूद उन्होंने तय किया कि वह इस मौके को सिर्फ इसलिए नहीं छोड़ेंगे क्योंकि उन्हें छुट्टी नहीं मिली।
उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दे दिया और ब्राजील जाने का फैसला किया।
लंदन से ब्राजील तक का सफर
नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने अपनी यात्रा शुरू की। सबसे पहले वह लंदन पहुंचे, जहां करीब एक सप्ताह तक पुर्तगाली भाषा सीखी। इसके बाद वह ब्राजील गए और वहां चार अलग-अलग परिवारों के साथ चार सप्ताह बिताए।
इस दौरान उन्होंने ब्राजील के कई स्थानों को देखा और वहां के लोगों के साथ समय बिताया। उनके मुताबिक, पांच सप्ताह का यह अनुभव उनकी जिंदगी के सबसे यादगार अनुभवों में शामिल हो गया।
लौटने के बाद सताया नौकरी का डर
यात्रा पूरी होने के बाद उनके मन में यह सवाल जरूर था कि अब आगे क्या होगा। नौकरी छोड़ने के कारण उन्हें चिंता थी कि वापस आने के बाद उन्हें नई नौकरी तलाशनी पड़ेगी। हालांकि, आज जब वह करीब 35 साल पुरानी इस घटना को याद करते हैं तो इसे अपनी जिंदगी का महत्वपूर्ण फैसला मानते हैं।
उनकी कहानी सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद लोग इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ लोगों के लिए यह कहानी अपने सपनों और इच्छाओं को प्राथमिकता देने की मिसाल है, जबकि कुछ लोग इसे परिस्थितियों और जिम्मेदारियों को देखते हुए लिया गया साहसी फैसला मान रहे हैं। इस कहानी ने एक बार फिर यह चर्चा छेड़ दी है कि जिंदगी में मिलने वाले दुर्लभ अवसरों और पेशेवर जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाना कितना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

