1 Oct 2026, Thu

‘₹12 LPA ₹4 लाख जैसा लगता है…’ बेंगलुरु के प्रोफेशनल्स ने शहर की महंगी कॉस्ट ऑफ लिविंग पर किया रिएक्ट

बेंगलुरु को देश की सिलिकॉन वैली कहा जाता है। आईटी और टेक्नोलॉजी सेक्टर में काम करने वाले हजारों प्रोफेशनल्स हर साल बेहतर करियर और अच्छी सैलरी की उम्मीद में इस शहर का रुख करते हैं। हालांकि, शहर की बढ़ती कॉस्ट ऑफ लिविंग अब कई युवाओं के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है। सोशल मीडिया पर वायरल एक पोस्ट में बेंगलुरु के महंगे जीवन और रोजमर्रा के खर्चों को लेकर प्रोफेशनल्स ने अपनी परेशानियां साझा की हैं।

इस चर्चा की शुरुआत स्थानीय प्रोफेशनल और कंटेंट क्रिएटर शिवांक गोयल के एक वीडियो से हुई। उन्होंने बेंगलुरु में अपनी कमाई और खर्चों को लेकर अनुभव साझा करते हुए कहा कि यहां ₹12 लाख सालाना की सैलरी भी करीब ₹4 लाख सालाना जितनी महसूस होती है। उनके इस बयान पर सोशल मीडिया यूजर्स की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

₹1 लाख से कम सैलरी वालों को लेकर क्या कहा?

वायरल वीडियो में शिवांक गोयल ने कहा कि अगर किसी व्यक्ति की मासिक सैलरी ₹1 लाख से कम है तो उसे बेंगलुरु आने से पहले शहर के खर्चों के बारे में अच्छी तरह विचार करना चाहिए। उनके मुताबिक, यहां मनोरंजन और सोशल लाइफ भी काफी खर्चीली हो गई है।

उन्होंने शहर की कैफे संस्कृति और टिकट वाले इवेंट्स का जिक्र करते हुए कहा कि यहां बाहर निकलने पर खर्च तेजी से बढ़ता है। उनका कहना है कि कई हॉबी और गतिविधियां भी अब सब्सक्रिप्शन या फीस से जुड़ी हुई हैं। ऐसे में अच्छी सैलरी होने के बावजूद बचत करना आसान नहीं रहता।

किराया और सिक्योरिटी डिपॉजिट भी बड़ी चुनौती

बेंगलुरु में रहने वाले लोगों के लिए मकान का किराया और सिक्योरिटी डिपॉजिट भी बड़ा खर्च है। वायरल पोस्ट में बताया गया कि करीब ₹2 लाख का सिक्योरिटी डिपॉजिट कई मामलों में सामान्य माना जाने लगा है।

प्राइम लोकेशन में 1BHK का किराया करीब ₹25,000 से ₹40,000 तक पहुंचने की बात भी सामने आई है। इसके अलावा कई जगहों पर 6 से 10 महीने तक का डिपॉजिट मांगे जाने की चर्चा है। इन खर्चों का सीधा असर युवाओं की मासिक बचत पर पड़ता है।

5 किलोमीटर की कैब राइड के लिए ₹600 तक खर्च

शहर की ट्रैफिक समस्या भी लोगों की परेशानी बढ़ाती है। शिवांक गोयल के मुताबिक, करीब 5 किलोमीटर की कैब राइड के लिए ₹600 तक खर्च करना पड़ सकता है और भारी ट्रैफिक के कारण एक घंटे तक का समय भी लग सकता है।

उन्होंने सार्वजनिक जगहों तक पहुंचने में लगने वाले समय का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, कुब्बन पार्क जैसे स्थानों पर जाने के लिए भी कई बार लंबी प्लानिंग करनी पड़ती है। उनका मानना है कि शहर की इन संरचनात्मक समस्याओं को केवल प्रवासियों को जिम्मेदार ठहराकर हल नहीं किया जा सकता।

सोशल मीडिया पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया

वायरल पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने अपने अनुभव साझा किए। कुछ यूजर्स ने महंगाई और डिमांड-सप्लाई की समस्या को लेकर सहमति जताई। वहीं कुछ लोगों का कहना था कि बेंगलुरु में सस्ते कैफे, फ्री वर्कशॉप और कम्युनिटी इवेंट्स जैसे विकल्प भी मौजूद हैं।

एक यूजर ने मजाकिया अंदाज में लिखा कि वह बेंगलुरु में 10 दिन बिताने आता है, लेकिन खर्च एक महीने की सैलरी के बराबर हो जाता है। इस चर्चा से साफ है कि अच्छी नौकरी और सैलरी के बावजूद शहर में किराया, ट्रांसपोर्ट, मनोरंजन और रोजमर्रा के खर्च कई प्रोफेशनल्स के बजट को प्रभावित कर रहे हैं।

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