14 May 2026, Thu

ममता के करीबी पूर्व DCP शांतनु सिन्हा बिस्वास गिरफ्तार, पहले लुकआउट नोटिस हुआ था जारी

Shantanu Sinha Biswas को गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया गया। उन पर पद का दुरुपयोग करने, राजनीतिक संरक्षण देने और करोड़ों रुपये के कथित घोटालों में शामिल होने के आरोप लगाए गए हैं। गिरफ्तारी के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।

जानकारी के मुताबिक हाल ही में Enforcement Directorate ने शांतनु सिन्हा बिस्वास के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया था। जांच एजेंसी उन्हें कई बार पूछताछ के लिए बुला चुकी थी, लेकिन वह लगातार पेश होने से बचते रहे। बताया जा रहा है कि ईडी ने उन्हें पांच बार समन भेजा था। इसके बावजूद उन्होंने जांच में सहयोग नहीं किया।

जांच एजेंसी ने उनके दोनों बेटों सयंतन और मनीष को भी पूछताछ के लिए बुलाया था, लेकिन वे भी निर्धारित समय पर एजेंसी के सामने पेश नहीं हुए। इसके बाद मामले में कार्रवाई तेज कर दी गई। हाल ही में उनके ठिकानों पर छापेमारी भी की गई थी।

ईडी ने कोलकाता के बालीगंज और गोलपार्क स्थित ठिकानों पर छापा मारकर बड़ी मात्रा में नकदी और कीमती सामान बरामद किया था। जांच एजेंसी के अनुसार छापेमारी के दौरान 1.47 लाख रुपये नकद, करीब 67 लाख रुपये से अधिक के सोने-चांदी के आभूषण और एक देसी पिस्तौल बरामद हुई थी। इन बरामदगी के बाद जांच और गंभीर हो गई।

शांतनु सिन्हा बिस्वास को राज्य की राजनीति में प्रभावशाली अधिकारी माना जाता रहा है। वह पश्चिम बंगाल और कोलकाता पुलिस कल्याण समिति में भी अहम जिम्मेदारियों पर रहे थे। हाल के दिनों में वह कई राजनीतिक कार्यक्रमों में भी दिखाई दिए थे, जिसके बाद विपक्ष ने उन पर सवाल उठाए थे।

इस मामले में सबसे बड़ा खुलासा कथित अपराधी Biswajit Poddar उर्फ ‘सोना पप्पू’ से जुड़े संबंधों को लेकर हुआ है। जांच एजेंसियों के मुताबिक सोना पप्पू पर हत्या के प्रयास, रंगदारी और अवैध वसूली जैसे कई गंभीर आरोप दर्ज हैं। दावा किया जा रहा है कि शांतनु सिन्हा बिस्वास ने अपने पद का इस्तेमाल कर उसके अवैध कारोबार को संरक्षण दिया।

जांच में यह भी सामने आया है कि कथित तौर पर संरक्षण के बदले करोड़ों रुपये की अवैध कमाई की गई। एजेंसियां अब इस बात की जांच कर रही हैं कि यह नेटवर्क कितने बड़े स्तर पर काम कर रहा था और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका थी।

राजनीतिक गलियारों में भी इस गिरफ्तारी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। विपक्षी दल लगातार मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, जबकि सत्ताधारी पक्ष की ओर से अभी विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला सिर्फ भ्रष्टाचार या मनी लॉन्ड्रिंग तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि इसमें प्रशासनिक और राजनीतिक गठजोड़ के बड़े पहलुओं की भी जांच हो सकती है। आने वाले दिनों में एजेंसियां कई और लोगों से पूछताछ कर सकती हैं।

फिलहाल शांतनु सिन्हा बिस्वास से पूछताछ जारी है और जांच एजेंसियां उनके वित्तीय लेनदेन, संपत्तियों और कथित आपराधिक नेटवर्क से जुड़े संबंधों की गहराई से जांच कर रही हैं।

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