देश में महंगाई को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ने लगी है। अप्रैल महीने में थोक महंगाई दर यानी WPI में अचानक तेज उछाल दर्ज किया गया है। मार्च में जहां यह दर 3.88 प्रतिशत थी, वहीं अप्रैल में बढ़कर 8.30 प्रतिशत तक पहुंच गई। सिर्फ एक महीने के भीतर महंगाई का लगभग दोगुना हो जाना अर्थव्यवस्था और आम लोगों दोनों के लिए बड़ा संकेत माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार इस बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ी वजह ईंधन, बिजली और कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज तेजी है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक सबसे ज्यादा असर फ्यूल और पावर सेक्टर में देखने को मिला। इस श्रेणी में महंगाई दर अप्रैल में 24.71 प्रतिशत तक पहुंच गई, जबकि मार्च में यह सिर्फ 1.05 प्रतिशत थी। इसका मतलब है कि ऊर्जा क्षेत्र में लागत तेजी से बढ़ रही है। बिजली उत्पादन से लेकर ट्रांसपोर्ट और उद्योगों तक हर क्षेत्र पर इसका असर पड़ सकता है। अगर ऊर्जा महंगी होती है तो इसका सीधा असर रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर भी दिखाई देता है।
कच्चे तेल की कीमतों में भी भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अप्रैल में कच्चे पेट्रोलियम में महंगाई दर 88.06 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो मार्च में 51.5 प्रतिशत थी। वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें बढ़ने के पीछे पश्चिम एशिया में जारी तनाव और सप्लाई से जुड़ी परेशानियां बड़ी वजह मानी जा रही हैं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलाव का असर सीधे घरेलू बाजार पर पड़ता है।
हालांकि राहत की बात यह रही कि खाद्य पदार्थों की कीमतों में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई। खाद्य महंगाई अप्रैल में 1.98 प्रतिशत रही, जो मार्च के मुकाबले मामूली बढ़ोतरी है। लेकिन गैर-खाद्य वस्तुओं में महंगाई 12.18 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इससे उद्योगों की लागत बढ़ सकती है और आने वाले समय में उपभोक्ता वस्तुएं महंगी हो सकती हैं।
सरकार ने फिलहाल पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी की कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश की है ताकि आम लोगों पर सीधा बोझ कम पड़े। हालांकि कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम में बढ़ोतरी की गई है, जिसका असर होटल और छोटे कारोबारों पर देखने को मिल सकता है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यदि वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें नियंत्रित नहीं हुईं तो आने वाले महीनों में खुदरा महंगाई भी तेजी से बढ़ सकती है।
थोक महंगाई बढ़ने का असर धीरे-धीरे आम लोगों की जेब तक पहुंचता है। ट्रांसपोर्ट महंगा होने पर सामान ढुलाई की लागत बढ़ती है और फिर किराना, सब्जियां, गैस, दूध और अन्य जरूरी चीजों की कीमतें भी बढ़ने लगती हैं। ऐसे में आने वाले समय में घरेलू बजट पर दबाव बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार और रिजर्व बैंक दोनों के लिए अब महंगाई को नियंत्रित रखना बड़ी चुनौती बनने वाला है।

