पहलगाम आतंकी हमले की बरसी पर उमर अब्दुल्ला का बड़ा बयान, शांति और सुरक्षा बनाए रखने का संकल्प
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी पर राज्य में एकता, शांति और सुरक्षा बनाए रखने का आह्वान किया है। 22 अप्रैल, 2025 को हुए इस दर्दनाक हमले को याद करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार का मुख्य लक्ष्य ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकना और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
“हम हर हाल में रोकेंगे ऐसी घटनाएं”
पत्रकारों से बातचीत करते हुए सीएम उमर अब्दुल्ला ने स्पष्ट कहा कि प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां लगातार इस दिशा में काम कर रही हैं कि भविष्य में पहलगाम जैसी घटनाएं दोबारा न हों। उन्होंने कहा,
“हम यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे कि अगर ऐसी किसी भी आतंकी साजिश की कोशिश होती है, तो उसे सफल नहीं होने दिया जाएगा। यही हमारी प्रतिबद्धता है।”
उन्होंने यह भी कहा कि खुफिया इनपुट से जुड़े मामलों पर विस्तृत जानकारी संबंधित सुरक्षा एजेंसियां ही साझा कर सकती हैं, लेकिन सरकार की प्राथमिकता पूरी तरह से सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है।
पीड़ित परिवारों के प्रति जताई संवेदना
मुख्यमंत्री ने हमले में मारे गए 26 लोगों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह घटना पूरे जम्मू-कश्मीर के लिए एक दर्दनाक अध्याय है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने शोक संतप्त परिवारों के प्रति एकजुटता जताते हुए मृतकों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने पर जोर
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि सरकार लगातार सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोग आतंकवाद के खिलाफ एकजुट हैं और शांति बनाए रखने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं। सरकार का उद्देश्य न केवल हिंसा को रोकना है, बल्कि लोगों का भरोसा बहाल करना भी है।
शांति और स्थिरता पर फोकस
सीएम ने कहा कि क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए सभी एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं। उनका कहना था कि सरकार का लक्ष्य केवल सुरक्षा नहीं बल्कि एक ऐसा माहौल बनाना है जहां लोग बिना डर के अपनी जिंदगी जी सकें।
निष्कर्ष
पहलगाम हमले की बरसी पर उमर अब्दुल्ला का यह बयान राज्य में शांति और सुरक्षा को लेकर सरकार की गंभीरता को दर्शाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर को हिंसा के दौर से बाहर निकालकर विकास और स्थिरता की ओर ले जाना उनकी प्राथमिकता है।

