8 Jun 2026, Mon

ग्रेट निकोबार विकास परियोजना: भारत की समुद्री ताकत और आर्थिक महत्वाकांक्षा को मिलेगी नई उड़ान

नई दिल्ली: भारत सरकार ने ग्रेट निकोबार द्वीप को एक प्रमुख सामरिक और आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना का ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है। इस परियोजना को देश की समुद्री सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और लॉजिस्टिक्स क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

परियोजना का उद्देश्य

ग्रेट निकोबार विकास परियोजना का मुख्य उद्देश्य अंडमान सागर और दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में भारत की रणनीतिक उपस्थिति को मजबूत करना है। इसके तहत बंदरगाह-आधारित विकास के साथ-साथ पर्यावरणीय संरक्षण और स्थानीय जनजातीय समुदायों के हितों का भी ध्यान रखा जा रहा है।

प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाएं

इस परियोजना के अंतर्गत कई बड़े ढांचागत विकास कार्य प्रस्तावित हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट
  • ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट और नौसेना एयर स्टेशन
  • आधुनिक टाउनशिप विकास
  • पावर प्लांट और अन्य आधारभूत संरचनाएं

सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं से भारत को वैश्विक समुद्री व्यापार में नई पहचान मिलेगी और विदेशी बंदरगाहों पर निर्भरता कम होगी।

रणनीतिक महत्व

ग्रेट निकोबार द्वीप की भौगोलिक स्थिति इसे बेहद महत्वपूर्ण बनाती है। यह सिक्स डिग्री चैनल के पास स्थित है, जहां से वैश्विक तेल और कंटेनर शिपिंग का बड़ा हिस्सा गुजरता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यहां बनने वाला ट्रांसशिपमेंट पोर्ट भारत को वैश्विक लॉजिस्टिक्स हब के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा।

भारतीय नौसेना की भूमिका

परियोजना के तहत प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का संचालन भारतीय नौसेना के नियंत्रण में होगा। इससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की निगरानी क्षमता और समुद्री सुरक्षा को मजबूती मिलेगी। साथ ही, आपदा राहत अभियानों में भी इसकी भूमिका अहम होगी।

भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के अनुसार, वर्ष 2040 तक यह एयरपोर्ट प्रतिवर्ष लगभग 13.5 लाख यात्रियों को संभालने में सक्षम होगा।

स्थान चयन और अध्ययन

सरकार ने परियोजना के लिए पांच संभावित स्थलों का अध्ययन किया था। तकनीकी, पर्यावरणीय और सामाजिक पहलुओं के मूल्यांकन के बाद गालाथिया बे को सबसे उपयुक्त स्थान चुना गया। मौजूदा INS Baaz एयरबेस के विस्तार पर भी विचार हुआ, लेकिन इसे व्यावहारिक रूप से सीमित पाया गया।

पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान

परियोजना के तहत पर्यावरणीय प्रभाव का विस्तृत अध्ययन किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, द्वीप के 81 प्रतिशत से अधिक हिस्से को राष्ट्रीय उद्यान, बायोस्फीयर रिजर्व, वन और जनजातीय संरक्षण क्षेत्रों के रूप में सुरक्षित रखा जाएगा।

इसके अलावा वन्यजीव संरक्षण, कोरल रीफ संरक्षण और मैंग्रोव पुनर्स्थापन के लिए 30 वर्षों में 2,220 करोड़ रुपये से अधिक की योजना प्रस्तावित है।

निष्कर्ष

ग्रेट निकोबार परियोजना भारत के लिए एक रणनीतिक, आर्थिक और पर्यावरणीय रूप से महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। यह न केवल समुद्री व्यापार को नई दिशा देगी, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की स्थिति को भी और मजबूत करेगी।

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