देश में ऊर्जा क्षेत्र को लेकर एक बड़ा बयान सामने आया है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने चेतावनी दी है कि मौजूदा वैश्विक हालात और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के चलते सरकारी तेल कंपनियों पर भारी वित्तीय दबाव बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर यही स्थिति बनी रही तो एक तिमाही में कंपनियों का नुकसान ₹1 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है।
भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के वार्षिक शिखर सम्मेलन में बोलते हुए पुरी ने बताया कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां हर दिन करीब ₹1000 करोड़ का नुकसान झेल रही हैं। इसकी मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और घरेलू स्तर पर ईंधन कीमतों का स्थिर रहना है।
लागत और बिक्री कीमत में बड़ा अंतर
मंत्री के अनुसार, पिछले दो वर्षों से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है, जबकि इसी अवधि में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में करीब 50% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे तेल कंपनियों की लागत और बिक्री कीमत के बीच बड़ा अंतर पैदा हो गया है।
आंकड़ों के मुताबिक, फिलहाल तेल कंपनियां पेट्रोल पर लगभग ₹14 प्रति लीटर और डीजल पर करीब ₹42 प्रति लीटर का नुकसान उठा रही हैं। वहीं एलपीजी सिलेंडर पर प्रति यूनिट लगभग ₹674 का घाटा हो रहा है। इस स्थिति को मंत्री ने गंभीर वित्तीय दबाव बताया है।
सप्लाई को लेकर कोई संकट नहीं
हालांकि, मंत्री ने स्पष्ट किया कि देश में ईंधन की सप्लाई को लेकर कोई संकट नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत के पास वर्तमान में लगभग 60 दिनों का कच्चे तेल का भंडार, 60 दिनों का एलएनजी भंडार और 45 दिनों का एलपीजी स्टॉक उपलब्ध है।
इसके अलावा इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी कंपनियां बिना किसी रुकावट के ईंधन की आपूर्ति सुनिश्चित कर रही हैं।
LPG उत्पादन में बढ़ोतरी
पुरी ने यह भी बताया कि घरेलू एलपीजी उत्पादन को 36,000 टन प्रतिदिन से बढ़ाकर 54,000 टन प्रतिदिन कर दिया गया है, जिससे आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत किया गया है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बावजूद भारत की ऊर्जा आपूर्ति स्थिर बनी हुई है।
सरकार का संतुलन वाला रुख
मंत्री ने कहा कि सरकार ईंधन की कीमतों और आम जनता पर पड़ने वाले असर को ध्यान में रखते हुए संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऊर्जा संरक्षण के आह्वान का जिक्र करते हुए कहा कि यह कोई प्रतिबंध नहीं बल्कि भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने की अपील है।
उन्होंने उद्योग जगत और आम लोगों से ऊर्जा के बेहतर उपयोग और वैकल्पिक ईंधन जैसे PNG की ओर बढ़ने की भी सलाह दी।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, भारत का ऊर्जा क्षेत्र इस समय वैश्विक अस्थिरता और महंगे कच्चे तेल के बीच एक जटिल स्थिति का सामना कर रहा है। जहां एक ओर सप्लाई सुरक्षित है, वहीं दूसरी ओर तेल कंपनियों की वित्तीय स्थिति पर गंभीर दबाव बना हुआ है।

