नई दिल्ली: ऑपरेशन सिंदूर को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। इस ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान को चीन की ओर से मदद मिलने की रिपोर्ट्स सामने आने के बाद भारत सरकार की प्रतिक्रिया भी आ गई है। विदेश मंत्रालय ने साफ कहा है कि इन रिपोर्टों में कोई नई बात नहीं है और यह वही तथ्यों की पुष्टि करती हैं जिनके बारे में भारत पहले से अवगत था।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि भारत ने इन रिपोर्टों को देखा है और यह पहले से मौजूद जानकारी को ही मजबूत करती हैं। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सिंदूर, पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में किया गया एक “सटीक, लक्षित और संतुलित” सैन्य अभियान था, जिसका उद्देश्य केवल आतंकवादी ढांचे को नष्ट करना था।
‘आतंकी ढांचे को निशाना बनाया गया’
विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि इस ऑपरेशन का लक्ष्य किसी भी देश के खिलाफ कार्रवाई करना नहीं था, बल्कि उन आतंकी नेटवर्क को खत्म करना था जो पाकिस्तान की सरजमीं से संचालित हो रहे थे। मंत्रालय ने यह भी दोहराया कि यह ढांचा लंबे समय से पाकिस्तान द्वारा समर्थित और प्रायोजित रहा है।
भारत ने अपने रुख को दोहराते हुए कहा कि आतंकवाद के खिलाफ उसकी नीति पूरी तरह स्पष्ट और शून्य सहिष्णुता (Zero Tolerance) पर आधारित है।
चीन की कथित भूमिका पर नजर
चीन की ओर से पाकिस्तान को समर्थन मिलने की खबरों पर भारत ने सीधे किसी टकरावपूर्ण टिप्पणी से बचते हुए संतुलित रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि अब यह उन देशों पर निर्भर करता है जो खुद को जिम्मेदार वैश्विक शक्ति मानते हैं कि वे यह तय करें कि आतंकवाद से जुड़े ढांचे को समर्थन देना उनकी अंतरराष्ट्रीय छवि पर क्या असर डाल सकता है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय को संदेश
भारत ने इस मौके पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी अप्रत्यक्ष संदेश दिया है कि आतंकवाद को किसी भी रूप में समर्थन देना वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए खतरा है। मंत्रालय ने कहा कि ऐसे मुद्दों पर सभी जिम्मेदार देशों को आत्ममंथन करना चाहिए।

