13 May 2026, Wed

सरकार को अब तक का सबसे ज्यादा डिविडेंड दे सकता है RBI, वित्त वर्ष 2024-25 में दिया था ₹2.69 लाख करोड़

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) एक बार फिर केंद्र सरकार को बड़ा वित्तीय लाभ देने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक, भारतीय रिजर्व बैंक इस महीने होने वाली अपनी केंद्रीय बोर्ड बैठक में वित्त वर्ष 2025-26 के लिए डिविडेंड की राशि को लेकर अहम फैसला ले सकता है। माना जा रहा है कि इस बार सरकार को पिछले साल से भी अधिक डिविडेंड मिल सकता है।

पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में RBI ने केंद्र सरकार को रिकॉर्ड 2.69 लाख करोड़ रुपये का डिविडेंड दिया था, जो उससे पिछले वर्ष 2.11 लाख करोड़ रुपये की तुलना में लगभग 27 प्रतिशत अधिक था। अब उम्मीद जताई जा रही है कि इस बार यह राशि और बढ़ सकती है, जिससे सरकार को अतिरिक्त वित्तीय मजबूती मिलेगी।

सूत्रों के अनुसार, RBI अपने लाभ का आकलन संशोधित आर्थिक पूंजी ढांचे (Economic Capital Framework) के आधार पर करता है। इसी ढांचे के तहत यह तय किया जाता है कि केंद्रीय बैंक अपनी बैलेंस शीट में कितनी राशि जोखिम बफर के रूप में रखेगा और कितना हिस्सा सरकार को ट्रांसफर करेगा। वर्तमान नियमों के अनुसार, आकस्मिक जोखिम बफर (Contingent Risk Buffer) को 4.5% से 7.5% के बीच बनाए रखा जाता है।

सरकारी बजट दस्तावेजों में अनुमान लगाया गया है कि आने वाले वित्त वर्ष 2026-27 में RBI, राष्ट्रीयकृत बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों से सरकार को कुल मिलाकर लगभग 3.16 लाख करोड़ रुपये डिविडेंड और सरप्लस के रूप में मिल सकते हैं। यह मौजूदा वित्त वर्ष की तुलना में लगभग 3.75 प्रतिशत अधिक है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के मजबूत प्रदर्शन का भी इसमें बड़ा योगदान है। हाल के वर्षों में बैंकों का मुनाफा लगातार बढ़ा है, जिससे सरकार को गैर-कर राजस्व में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।

बजट आंकड़ों के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और अन्य निवेशों से डिविडेंड आय लगभग 75,000 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। कुल मिलाकर, केंद्र सरकार को अगले वित्त वर्ष में गैर-कर राजस्व के रूप में करीब 6.66 लाख करोड़ रुपये मिलने की संभावना जताई गई है।

डिविडेंड और सरप्लस ट्रांसफर सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण वित्तीय स्रोत होता है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितताएं बनी हुई हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव के बीच यह अतिरिक्त आय सरकार के लिए राहत का काम कर सकती है।

अब सभी की नजरें RBI की आगामी बोर्ड बैठक पर टिकी हैं, जहां इस डिविडेंड राशि पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।

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