भारत निर्वाचन आयोग ने गुरुवार को एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए पांच राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश से आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। इन राज्यों में हाल ही में विधानसभा चुनाव संपन्न हुए थे और अब परिणाम घोषित होने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों पर लगी रोक समाप्त कर दी गई है।
जिन राज्यों से आचार संहिता हटाई गई है, उनमें असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी शामिल हैं। चुनाव आयोग के अवर सचिव प्रफुल्ल अवस्थी की ओर से जारी पत्र में यह स्पष्ट किया गया कि 4 मई को मतगणना पूरी होने के बाद इन सभी राज्यों में नई सरकारों का गठन हो चुका है या प्रक्रिया अंतिम चरण में है, जिसके चलते आचार संहिता को समाप्त किया जा रहा है।
उपचुनावों के परिणाम भी शामिल
निर्वाचन आयोग ने यह भी बताया कि गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, नागालैंड और त्रिपुरा में हुए उपचुनावों के परिणाम भी घोषित हो चुके हैं। इसी आधार पर इन क्षेत्रों में भी आदर्श आचार संहिता को खत्म करने का निर्णय लिया गया है। आयोग के अनुसार अब इन सभी जगहों पर सामान्य प्रशासनिक गतिविधियां पूरी तरह से बहाल हो सकेंगी।
पश्चिम बंगाल की एक सीट पर अपवाद
हालांकि इस फैसले में पश्चिम बंगाल की एक सीट को अपवाद रखा गया है। आयोग ने बताया कि फलता विधानसभा सीट (निर्वाचन क्षेत्र संख्या 144) पर चुनाव प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं के कारण दोबारा मतदान कराया जाएगा। इस वजह से इस सीट पर आचार संहिता अभी भी लागू रहेगी।
सूत्रों के अनुसार, फलता सीट पर 29 अप्रैल को मतदान हुआ था, लेकिन शिकायतों और गड़बड़ियों की जांच के बाद चुनाव आयोग ने वहां चुनाव रद्द कर दिया। अब 21 मई को यहां पुनः मतदान कराया जाएगा और परिणाम 24 मई को घोषित किया जाएगा।
आचार संहिता हटने के बाद क्या बदलेगा?
आदर्श आचार संहिता हटने के बाद अब संबंधित राज्यों की सरकारें पूरी तरह से सक्रिय हो सकेंगी। इसका सबसे बड़ा असर प्रशासनिक और नीतिगत फैसलों पर पड़ेगा।
अब राज्य सरकारें नई योजनाओं की घोषणा कर सकेंगी, सरकारी भर्तियों की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी और लंबित तबादलों को भी अंतिम रूप दिया जा सकेगा। चुनाव प्रक्रिया के दौरान इन सभी गतिविधियों पर रोक लगा दी जाती है ताकि निष्पक्षता बनी रहे।
राज्यों में नई सरकारों की तस्वीर
हाल ही में आए चुनाव परिणामों के अनुसार कई राज्यों में सत्ता परिवर्तन और नई राजनीतिक समीकरण देखने को मिले हैं। पश्चिम बंगाल और असम में भारतीय जनता पार्टी ने बहुमत हासिल किया है और सरकार बनाई है।
पुडुचेरी में एनडीए गठबंधन ने एक बार फिर सत्ता में वापसी की है। वहीं केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ गठबंधन ने सरकार बनाने में सफलता हासिल की है।
तमिलनाडु में इस बार चुनाव परिणाम बेहद दिलचस्प रहे, जहां किसी एक पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। यहां थलापति विजय की पार्टी TVK ने 108 सीटों के साथ मजबूत प्रदर्शन किया है और राज्य की राजनीति में नई ताकत के रूप में उभरी है।
आगे क्या?
आचार संहिता हटने के बाद अब इन राज्यों में विकास कार्यों और राजनीतिक फैसलों की रफ्तार तेज होने की उम्मीद है। वहीं, नई सरकारों के सामने जनता से किए गए वादों को पूरा करने की बड़ी चुनौती होगी।
चुनाव आयोग के इस फैसले को प्रशासनिक सामान्यीकरण की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है, जिससे राज्यों में स्थिर शासन व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

