अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने के बाद देश के लोगों को पेट्रोल और डीजल के दाम घटने की उम्मीद है। हालांकि, सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने फिलहाल ईंधन की खुदरा कीमतों में कटौती नहीं की है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इसकी वजह बताते हुए कहा है कि तेल कंपनियां अभी उस कच्चे तेल को प्रोसेस कर रही हैं, जिसे पश्चिम एशिया संकट के दौरान काफी ऊंची कीमतों पर खरीदा गया था।
हरदीप सिंह पुरी के मुताबिक, तेल कंपनियां आमतौर पर अपनी जरूरत के लिए कच्चा तेल काफी पहले खरीदती हैं। इस समय रिफाइनरियों में अप्रैल और मई के दौरान खरीदा गया क्रूड ऑयल प्रोसेस किया जा रहा है। उस दौरान पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी थीं। ऐसे में वैश्विक कीमतों में हाल में आई गिरावट का फायदा तुरंत पेट्रोल पंपों तक पहुंचना मुश्किल है।
तेल कंपनियों को हुआ 74,781 करोड़ रुपये का नुकसान
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सरकारी तेल विपणन कंपनियों को 30 जून 2026 तक पेट्रोल, डीजल और एलपीजी को लागत से कम कीमत पर बेचने के कारण करीब 74,781 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। कंपनियों ने पश्चिम एशिया संकट के दौरान कच्चे तेल की बढ़ी हुई लागत का पूरा बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला। इसका उद्देश्य आम उपभोक्ताओं को ईंधन की कीमतों में अचानक होने वाली बड़ी वृद्धि से बचाना था।
पुरी ने कहा कि संकट के दौरान विकसित देशों में पेट्रोल की कीमतों में करीब 20 प्रतिशत और भारत के पड़ोसी देशों में लगभग 35 प्रतिशत तक वृद्धि देखने को मिली। इसके मुकाबले भारत में पेट्रोल के दामों में लगभग 5.58 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। उनके अनुसार, भारतीय तेल कंपनियों और वित्तीय तंत्र ने अंतरराष्ट्रीय कीमतों में हुई वृद्धि के एक बड़े हिस्से को खुद वहन किया।
देश में जारी रही ईंधन की आपूर्ति
पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि 28 फरवरी से जून के अंत तक चले संकट के दौरान भारत के लगभग 1.07 लाख पेट्रोल पंपों में कहीं भी ईंधन की आपूर्ति पूरी तरह बंद नहीं हुई। तेल की उपलब्धता बनाए रखी गई और देश में किसी बड़े स्तर पर पेट्रोल या डीजल की कमी जैसी स्थिति पैदा नहीं हुई।
कब सस्ते हो सकते हैं पेट्रोल और डीजल?
पेट्रोल और डीजल के दामों में संभावित कटौती के सवाल पर हरदीप सिंह पुरी ने तत्काल राहत का कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं दिया। उन्होंने कहा कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अगले कुछ सप्ताह या दो से तीन महीने तक निचले स्तर पर बनी रहती हैं, तो ईंधन के दाम घटाने पर विचार करना उचित होगा। फिलहाल इसे उन्होंने संभावित परिस्थिति बताया है।
इस बीच निजी ईंधन विक्रेता नायरा एनर्जी ने एक जुलाई से अपने नेटवर्क पर पेट्रोल के दाम पांच रुपये और डीजल के दाम तीन रुपये प्रति लीटर घटाए हैं। हालांकि, पुरी के अनुसार कंपनी ने संकट के दौरान कीमतें बढ़ाई थीं और अब उसी बढ़ोतरी को वापस लिया है। सरकारी तेल कंपनियों की ओर से किसी कटौती का फैसला अंतरराष्ट्रीय कीमतों की स्थिरता, पुराने महंगे स्टॉक और पिछले घाटे की स्थिति को ध्यान में रखकर लिया जा सकता है।

