उत्तराखंड के रुद्रपुर में परिवहन विभाग की चेकिंग के दौरान एक ऐसा मामला सामने आया जिसने सड़क सुरक्षा और यात्री परिवहन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लखीमपुर खीरी से पंजाब जा रही एक निजी बस में क्षमता से कई गुना अधिक यात्रियों को बैठाकर सफर कराया जा रहा था। जांच के दौरान बस में कुल 168 यात्री सवार मिले, जबकि बस की स्वीकृत क्षमता केवल 30 स्लीपर और एक सीट की थी। बस के अंदर का वीडियो सामने आने के बाद यह मामला तेजी से चर्चा का विषय बन गया है।
आधी रात को हुई कार्रवाई
जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई रुद्रपुर के लालपुर इलाके में देर रात करीब एक बजे की गई। परिवहन विभाग के सचल दल ने नियमित चेकिंग के दौरान बस को रोका। प्रारंभिक जांच में ही बस में भारी भीड़ दिखाई दी, जिसके बाद यात्रियों की गिनती कराई गई। अधिकारियों के मुताबिक बस में 138 वयस्क और 30 बच्चे सवार थे। इतनी बड़ी संख्या में यात्रियों को एक साथ बस में भरकर ले जाना सुरक्षा मानकों का गंभीर उल्लंघन माना जा रहा है।
बिना परमिट और टैक्स के चल रही थी बस
जांच में यह भी सामने आया कि बस बिना वैध परमिट और टैक्स के संचालित की जा रही थी। परिवहन विभाग ने मौके पर ही बस का चालान किया और उसे रुद्रपुर रोडवेज स्टेशन में सीज कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि बस संचालक ने कई नियमों का उल्लंघन किया था और यात्रियों की सुरक्षा को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया।
बताया जा रहा है कि बस लखीमपुर खीरी से पंजाब के लुधियाना, खन्ना, जालंधर और अंबाला जा रही थी। यात्रा के दौरान यात्रियों से 700 से 800 रुपये प्रति व्यक्ति किराया वसूला गया था।
वीडियो ने बढ़ाई चिंता
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में बस के अंदर लोगों की भारी भीड़ दिखाई दे रही है। कई यात्री सीटों के बीच, गलियारों में और एक-दूसरे से सटकर बैठे नजर आ रहे हैं। कुछ बच्चों को गोद में बैठाकर सफर कराया जा रहा था। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी स्थिति में किसी भी दुर्घटना की स्थिति में यात्रियों को बाहर निकालना बेहद मुश्किल हो सकता है।
यात्रियों के सामने खड़ा हुआ संकट
बस सीज होने के बाद यात्रियों के सामने आगे की यात्रा का संकट खड़ा हो गया। परिवहन विभाग ने रोडवेज बसों के माध्यम से यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने की व्यवस्था करने का प्रयास किया। हालांकि किराये और सीटों की उपलब्धता को लेकर कुछ यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
सख्त कार्रवाई की तैयारी
परिवहन विभाग के अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि मामले में बस संचालक और संबंधित ट्रैवल एजेंसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। विभाग का कहना है कि ओवरलोडिंग, बिना परमिट संचालन और कर नियमों के उल्लंघन जैसे मामलों में कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि कुछ निजी बस संचालक अधिक मुनाफे के लिए यात्रियों की जान जोखिम में डालने से भी नहीं हिचकते। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में नियमित जांच, डिजिटल परमिट निगरानी और सख्त दंडात्मक कार्रवाई ही इस तरह की लापरवाही पर रोक लगा सकती है।

