नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार, 2 जुलाई 2026 को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में बढ़त दर्ज की। आईटी कंपनियों के शेयरों में जोरदार खरीदारी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ। कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 579.48 अंक यानी 0.75 प्रतिशत बढ़कर 77,502.12 पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 169.85 अंक या 0.71 प्रतिशत चढ़कर 24,175.70 के स्तर पर पहुंच गया।
बाजार की तेजी केवल प्रमुख सूचकांकों तक सीमित नहीं रही। व्यापक बाजार में भी खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स लगभग 0.50 प्रतिशत मजबूत हुआ, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 ने करीब 1.27 प्रतिशत की छलांग लगाई। इससे संकेत मिला कि निवेशकों ने बड़ी कंपनियों के साथ मझोली और छोटी कंपनियों के शेयरों में भी खरीदारी की।
आईटी शेयरों ने संभाला बाजार
गुरुवार की तेजी का सबसे बड़ा कारण आईटी शेयरों की मजबूत वापसी रही। लगातार चार कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद निफ्टी आईटी इंडेक्स 4.64 प्रतिशत उछल गया। यह मई 2025 के बाद इंडेक्स की सबसे बड़ी एकदिवसीय बढ़त बताई गई। हाल में तेज गिरावट के कारण आईटी शेयरों का मूल्यांकन नीचे आया था, जिसके बाद निवेशकों ने निचले स्तरों पर खरीदारी की।
इन्फोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, टेक महिंद्रा, कोफोर्ज और एमफैसिस सहित कई प्रमुख टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयरों में मजबूत तेजी दर्ज की गई। आईटी शेयरों के अलावा ऑटो, रियल्टी, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, सीमेंट और केमिकल सेक्टर के सूचकांक भी एक प्रतिशत से अधिक बढ़े। हालांकि, निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स लगभग 0.40 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ।
कच्चे तेल में गिरावट से मिला सहारा
अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में लगातार तीसरे दिन गिरावट ने भी भारतीय बाजार को सहारा दिया। ब्रेंट क्रूड करीब दो प्रतिशत गिरकर 70.33 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। अमेरिका और ईरान के बीच दोहा में हुई वार्ता में प्रगति तथा होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति सामान्य रहने की खबरों से सप्लाई बाधित होने की आशंका कम हुई।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इसलिए कच्चा तेल सस्ता होने से आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत कम होने की उम्मीद बढ़ती है। इसी वजह से तेल की कीमतों में गिरावट को भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार के लिए सकारात्मक माना गया।
रुपया मजबूत नहीं, कमजोर हुआ
बाजार में तेजी के बावजूद भारतीय रुपया गुरुवार को मजबूत होने के बजाय लगातार चौथे सत्र में कमजोर हुआ। रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले करीब 0.1 प्रतिशत गिरकर 95.3925 के स्तर पर बंद हुआ। कारोबारी भुगतान और आर्बिट्राज से जुड़ी डॉलर मांग ने रुपये पर दबाव बनाया। इसलिए रुपये के 84.90 पर पहुंचने और 26 पैसे मजबूत होने का दावा उपलब्ध नवीनतम आंकड़ों से मेल नहीं खाता।
आने वाले सत्रों में बाजार की चाल कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों के रुख, अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और आईटी शेयरों की तेजी कायम रहने पर निर्भर करेगी।

