ग्लोबल मार्केट से मिले कमजोर संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बीच बुधवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत निराशाजनक रही। बाजार खुलते ही बिकवाली का दबाव हावी हो गया, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक लाल निशान में कारोबार करते दिखे। शुरुआती कारोबार में निवेशकों का सेंटीमेंट कमजोर रहा और बाजार में चौतरफा दबाव देखने को मिला। Reuters के अनुसार, शुरुआती ट्रेड में निफ्टी 0.64% गिरकर 24,245.90 और सेंसेक्स 0.65% टूटकर 77,674.61 के आसपास पहुंच गया।
बाजार खुलते ही सेंसेक्स 420 अंक से ज्यादा टूटकर 77,700 के आसपास कारोबार करता दिखा, जबकि निफ्टी 134 अंक फिसलकर 24,300 के नीचे चला गया। शुरुआती सत्र में बाजार की चौड़ाई भी कमजोर नजर आई। जहां कुछ शेयरों में खरीदारी दिखी, वहीं गिरावट वाले शेयरों की संख्या ज्यादा रही। इससे साफ संकेत मिला कि निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बच रहे हैं।
बाजार पर सबसे बड़ा दबाव कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी का रहा। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास टैंकरों पर हमले की खबरों के बाद ब्रेंट क्रूड 75 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया। Reuters के मुताबिक, अमेरिका-ईरान तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड करीब 2.7% उछलकर 76.2 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए महंगा कच्चा तेल महंगाई, चालू खाते और कॉरपोरेट लागत पर दबाव बढ़ा सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर एविएशन, पेंट, टायर और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के शेयरों पर दिखाई दिया। Economic Times की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका द्वारा ईरान पर हमलों और क्रूड में उछाल के बाद इंडिगो, स्पाइसजेट, HPCL और BPCL जैसे तेल-संवेदनशील शेयरों में 5% तक की गिरावट देखने को मिली।
एविएशन सेक्टर में इंडिगो की पैरेंट कंपनी इंटरग्लोब एविएशन पर भी दबाव नजर आया। DGCA की ताजा रिपोर्ट के बाद शेयर में गिरावट देखी गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, मई में इंडिगो की बाजार हिस्सेदारी मामूली घटकर 64.9% रही, जबकि पैसेंजर लोड फैक्टर 86.4% तक पहुंचा। दूसरी ओर एयर इंडिया ग्रुप की हिस्सेदारी बढ़कर 25.6% बताई गई। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और बाजार हिस्सेदारी में मामूली गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी।
शुरुआती कारोबार में रिलायंस, एशियन पेंट्स, बजाज फाइनेंस, एसबीआई और मारुति जैसे बड़े शेयरों में कमजोरी देखी गई। वहीं सन फार्मा, एचसीएल टेक, इन्फोसिस और टीसीएस जैसे आईटी और फार्मा शेयर बाजार को कुछ हद तक सहारा देने की कोशिश करते दिखे। Reuters ने भी बताया कि तेल-संवेदनशील सेक्टरों में दबाव के बीच फार्मा और हेल्थकेयर जैसे डिफेंसिव सेक्टरों में हल्की मजबूती देखने को मिली।
कुल मिलाकर, घरेलू शेयर बाजार पर ग्लोबल अनिश्चितता, क्रूड ऑयल की तेजी और भू-राजनीतिक तनाव का असर साफ दिखा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया के हालात में स्थिरता नहीं आती, तब तक निवेशकों को बाजार में उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना होगा।

