जून महीने में देशभर में चीनी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है। कई प्रमुख बाजारों में पिछले एक महीने के दौरान चीनी के दाम 6 से 7 फीसदी तक बढ़ गए हैं। कीमतों में इस उछाल की सबसे बड़ी वजह जून में सामान्य से कम बारिश और गन्ने की फसल को लेकर बढ़ी चिंता मानी जा रही है। इसके साथ ही मांग बढ़ने से भी बाजार में चीनी की कीमतों को सपोर्ट मिला है।
उद्योग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, देश के सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्यों में शामिल महाराष्ट्र में मिलों से निकलने वाली चीनी की कीमत करीब 38.5 रुपये प्रति किलो से बढ़कर लगभग 41.5 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। वहीं कोल्हापुर बाजार में चीनी की थोक कीमत एक महीने में 7 फीसदी से ज्यादा बढ़कर करीब 4,120 रुपये प्रति क्विंटल बताई जा रही है। थोक बाजार में आई इस तेजी का असर आने वाले दिनों में खुदरा कीमतों पर भी दिख सकता है।
बाजार जानकारों का कहना है कि जून में मानसून की धीमी शुरुआत ने गन्ने की फसल को लेकर चिंता बढ़ा दी थी। कई हिस्सों में बारिश सामान्य से कम रहने के कारण किसानों और मिल मालिकों को उत्पादन प्रभावित होने की आशंका सताने लगी। गन्ना पानी पर निर्भर फसल है और शुरुआती मानसून कमजोर रहने से पैदावार पर असर पड़ने का डर बढ़ जाता है। इसी चिंता के चलते चीनी की कीमतों में तेजी आई।
दूसरी ओर मांग में भी सुधार देखने को मिला है। अधिक मास समाप्त होने के बाद शादी-विवाह, धार्मिक कार्यक्रमों और आने वाले त्योहारों की तैयारियों के कारण चीनी की खपत बढ़ने लगी है। मिठाई, पेय पदार्थ और प्रोसेस्ड फूड इंडस्ट्री में मांग बढ़ने से थोक बाजार में खरीदारी तेज हुई है। यही वजह है कि सप्लाई की चिंता और मांग में तेजी ने मिलकर कीमतों को ऊपर धकेल दिया।
हालांकि जुलाई की शुरुआत में कई राज्यों में बारिश बेहतर हुई है। हालिया बारिश से गन्ने की खड़ी फसल को राहत मिलने की उम्मीद है। अगर आने वाले दिनों में मानसून सामान्य रहता है, तो उत्पादन को लेकर बनी चिंता कुछ कम हो सकती है और कीमतों में स्थिरता लौट सकती है। लेकिन अगर बारिश दोबारा कमजोर पड़ती है, तो चीनी के दाम और चढ़ सकते हैं।
सरकार ने घरेलू उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए पहले ही चीनी निर्यात पर रोक लगा दी है। मई में सरकार ने चीनी के निर्यात पर 30 सितंबर 2026 तक या अगले आदेश तक प्रतिबंध लगाया था। Reuters के अनुसार, यह फैसला घरेलू कीमतों पर लगाम लगाने और आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया था।
भारत दुनिया के बड़े चीनी उत्पादक देशों में शामिल है, लेकिन मौसम, गन्ने की पैदावार और घरेलू मांग का असर कीमतों पर सीधे दिखाई देता है। फिलहाल बाजार की नजर मानसून की चाल, गन्ने की फसल की स्थिति और सरकार की अगली नीति पर टिकी है। अगर सप्लाई बेहतर रही तो आम लोगों को राहत मिल सकती है, लेकिन कमजोर मानसून महंगाई की चिंता और बढ़ा सकता है।

