28 May 2026, Thu

भारत ने पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र में दिया करारा जवाब, कहा- भुगतने होंगे सीमा पार आतंकवाद के गंभीर नतीजे

न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र में भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान को आतंकवाद के मुद्दे पर कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि P. Harish ने पाकिस्तान की टिप्पणियों का जवाब देते हुए कहा कि सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने और उसका समर्थन करने वाले देशों को उसके परिणाम भुगतने पड़ते हैं। उन्होंने दोहराया कि भारत को अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने का पूरा अधिकार है।

भारत की यह प्रतिक्रिया उस समय आई जब संयुक्त राष्ट्र के मंच पर पाकिस्तान ने एक बार फिर कश्मीर और क्षेत्रीय मुद्दों को उठाने की कोशिश की। भारतीय प्रतिनिधि ने पाकिस्तान के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने से इतिहास नहीं बदला जा सकता।

पाकिस्तान की टिप्पणियों का दिया जवाब

संयुक्त राष्ट्र में संबोधन के दौरान पी. हरीश ने कहा कि पाकिस्तान की ओर से की गई अनुचित और आधारहीन टिप्पणियों का जवाब देना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से ही भारत को सीमा पार से होने वाले हमलों और आतंकवादी गतिविधियों का सामना करना पड़ा है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत के जिन क्षेत्रों पर पाकिस्तान दावा करता है, वे कानूनी और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत भारत का अभिन्न हिस्सा हैं। ऐसे में पाकिस्तान के दावे न केवल तथ्यहीन हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून और ऐतिहासिक वास्तविकताओं के भी विपरीत हैं।

आतंकवाद पर पाकिस्तान को घेरा

भारतीय प्रतिनिधि ने पाकिस्तान पर सीधे निशाना साधते हुए कहा कि उसने दशकों से सीमा पार आतंकवाद को एक रणनीति के रूप में इस्तेमाल किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने कई बार भारत के खिलाफ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष आक्रामक गतिविधियों को समर्थन दिया है, जिससे क्षेत्रीय शांति और स्थिरता प्रभावित हुई है।

पी. हरीश ने कहा कि पाकिस्तान की “हजार जख्म देकर भारत को कमजोर करने” की नीति उसकी वास्तविक सोच को उजागर करती है। आतंकवाद और कट्टरपंथ को बढ़ावा देना किसी भी देश की अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के अनुरूप नहीं है।

भारत को आत्मरक्षा का अधिकार

भारत ने संयुक्त राष्ट्र में यह भी स्पष्ट किया कि हर संप्रभु राष्ट्र की तरह उसे भी अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने का अधिकार है। पी. हरीश ने कहा कि जब किसी देश को सीमा पार आतंकवाद का सामना करना पड़ता है, तो उसे अपने नागरिकों और सीमाओं की रक्षा के लिए कदम उठाने का पूरा अधिकार होता है।

उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई को किसी भी तरह से गलत नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि यह वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए आवश्यक है।

आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक एकजुटता की अपील

भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी आतंकवाद के मुद्दे पर दोहरे मानदंड छोड़ने की अपील की। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि आतंकवाद को किसी भी रूप, उद्देश्य या बहाने से स्वीकार नहीं किया जा सकता।

उन्होंने जोर देकर कहा कि दुनिया को उन देशों के खिलाफ एकजुट होना चाहिए जो आतंकवादी संगठनों को समर्थन, संरक्षण या संसाधन उपलब्ध कराते हैं। आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई तभी संभव है जब सभी देश बिना किसी भेदभाव के इसके खिलाफ खड़े हों।

पाकिस्तान को दी स्पष्ट नसीहत

अपने संबोधन के अंत में पी. हरीश ने पाकिस्तान को सलाह दी कि वह आतंकवाद और हिंसक कट्टरवाद के सभी रूपों से दूरी बनाए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को विश्वसनीय और स्थायी तरीके से आतंकवाद का समर्थन समाप्त करना चाहिए और क्षेत्रीय शांति एवं स्थिरता के लिए रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए।

भारत का यह बयान ऐसे समय आया है जब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद के मुद्दे को लेकर चर्चा तेज है। भारत लगातार यह कहता रहा है कि सीमा पार आतंकवाद न केवल उसके लिए बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा है, और इसके खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की आवश्यकता है।

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