नई दिल्ली। बैंक से जुड़े जरूरी कामकाज की योजना बना रहे लोगों के लिए सितंबर का महीना परेशानी भरा हो सकता है। बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों के संगठन यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने 11 सितंबर 2026 को देशव्यापी हड़ताल पर जाने का ऐलान किया है। यूनियनों का कहना है कि उनकी कई महत्वपूर्ण मांगें लंबे समय से लंबित हैं और सरकार तथा बैंक प्रबंधन की ओर से इन पर अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए हैं।
UFBU में बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों की नौ प्रमुख यूनियनों का संयुक्त संगठन शामिल है। संगठन ने पांच दिन की बैंकिंग व्यवस्था, परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) और पेंशन से जुड़े मुद्दों समेत कई मांगों को लेकर हड़ताल का फैसला किया है।
11 सितंबर को बैंकिंग सेवाओं पर असर
प्रस्तावित देशव्यापी हड़ताल शुक्रवार, 11 सितंबर को होगी। इसके बाद 12 सितंबर शनिवार और 13 सितंबर रविवार है। ऐसे में हड़ताल के साथ सामान्य साप्ताहिक अवकाश जुड़ने से कई जगहों पर बैंक शाखाओं में सेवाएं लगातार कई दिनों तक प्रभावित हो सकती हैं।
कुछ राज्यों में 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी के कारण बैंक अवकाश भी हो सकता है। ऐसे में जिन ग्राहकों को बैंक शाखा जाकर जरूरी काम निपटाने हैं, उन्हें छुट्टियों और हड़ताल की स्थिति को ध्यान में रखते हुए पहले से योजना बनानी होगी। हालांकि, डिजिटल बैंकिंग, UPI और ATM जैसी सेवाओं पर असर संबंधित परिस्थितियों और बैंक के संचालन पर निर्भर करेगा।
पांच दिन की बैंकिंग व्यवस्था प्रमुख मांग
बैंक यूनियनों की सबसे प्रमुख मांग सप्ताह में पांच दिन बैंकिंग व्यवस्था लागू करने की है। इसके तहत बैंक सोमवार से शुक्रवार तक खुलें और शनिवार-रविवार को अवकाश रहे।
यूनियनों का कहना है कि 8 मार्च 2024 को हुए 12वें द्विपक्षीय समझौते और 9वें संयुक्त नोट में पांच दिन की बैंकिंग व्यवस्था को लेकर सहमति बनी थी। प्रस्ताव के मुताबिक सोमवार से शुक्रवार तक काम के समय में प्रतिदिन करीब 40 मिनट की बढ़ोतरी की जानी थी।
बैंक यूनियनों के अनुसार यह प्रस्ताव सरकार के पास मंजूरी के लिए भेजा गया था, लेकिन दो साल से अधिक समय बीतने के बावजूद इस पर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। इसी देरी को लेकर यूनियनें नाराज हैं।
PLI योजना को लेकर भी विरोध
UFBU की दूसरी प्रमुख आपत्ति परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव यानी PLI व्यवस्था को लेकर है। यूनियनों का कहना है कि नई व्यवस्था में अलग-अलग श्रेणी के बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच इंसेंटिव में बड़ा अंतर है।
यूनियनों के मुताबिक, स्केल IV और उससे ऊपर के अधिकारियों को व्यक्तिगत प्रदर्शन के आधार पर अधिकतम 365 दिनों के बेसिक वेतन तक PLI मिल सकता है। वहीं कर्मचारियों और स्केल-3 तक के अधिकारियों के लिए अधिकतम 15 दिनों के बेसिक वेतन और महंगाई भत्ते के बराबर PLI का प्रावधान है।
यूनियनों का तर्क है कि इस व्यवस्था से कर्मचारियों के बीच असमानता बढ़ सकती है और इसे लेकर उनकी चिंताओं पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
ग्राहकों को पहले से करनी होगी तैयारी
अगर हड़ताल लागू होती है तो बैंक शाखाओं में कैश जमा करने, निकासी, चेक से जुड़े काम, दस्तावेज जमा करने और अन्य शाखा-आधारित सेवाओं पर असर पड़ सकता है। ऐसे में ग्राहकों के लिए बेहतर होगा कि वे 11 सितंबर से पहले अपने जरूरी बैंकिंग कार्य निपटा लें।
फिलहाल UFBU की हड़ताल की घोषणा के बाद बैंकिंग सेक्टर में हलचल बढ़ गई है। अब सरकार और बैंक प्रबंधन की ओर से यूनियनों की मांगों पर क्या कदम उठाया जाता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।

