नई दिल्ली। देश के कई हिस्सों में इन दिनों वायरल संक्रमण और फ्लू जैसे लक्षणों वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है। कई मरीजों में तेज बुखार, खांसी, गले में खराश, शरीर में दर्द और थकान जैसे लक्षण देखने को मिल रहे हैं। ऐसे में H1N1 इन्फ्लुएंजा, जिसे आम बोलचाल में स्वाइन फ्लू कहा जाता है, को लेकर भी लोगों की चिंता बढ़ी है। खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों को संक्रमण से बचाव को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, इन्फ्लुएंजा और कोविड-19 दोनों ही श्वसन संक्रमण हैं और इनके कई लक्षण एक जैसे हो सकते हैं। ऐसे में केवल लक्षणों के आधार पर दोनों संक्रमणों में अंतर करना हमेशा आसान नहीं होता।
क्या है H1N1 स्वाइन फ्लू?
प्रोफेसर डॉक्टर संजीव बगाई के मुताबिक, H1N1 इन्फ्लुएंजा वायरस का एक स्ट्रेन है, जिसे आम भाषा में स्वाइन फ्लू कहा जाता है। हालांकि, H1N1 के लिए ‘स्वाइन फ्लू’ नाम पूरी तरह सटीक नहीं माना जाता।
इन्फ्लुएंजा वायरस समय के साथ अपने स्वरूप में बदलाव करता रहता है। वायरस में होने वाले छोटे बदलावों को एंटीजेनिक ड्रिफ्ट, जबकि बड़े बदलावों को एंटीजेनिक शिफ्ट कहा जाता है। इसी वजह से फ्लू की वैक्सीन में भी समय-समय पर बदलाव किए जाते हैं, ताकि उस समय सक्रिय प्रमुख स्ट्रेन के खिलाफ बेहतर सुरक्षा मिल सके।
इन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत
फ्लू और दूसरे श्वसन संक्रमण हर उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकते हैं, लेकिन कुछ लोगों में संक्रमण के गंभीर होने का खतरा ज्यादा रहता है। इनमें शामिल हैं:
- 5 साल से कम उम्र के बच्चे
- 65 साल से अधिक उम्र के बुजुर्ग
- गर्भवती महिलाएं
- कमजोर इम्युनिटी वाले लोग
- अंग प्रत्यारोपण करा चुके मरीज
- इम्यूनोसप्रेसेंट दवाएं लेने वाले लोग
- गंभीर डायबिटीज या हाइपरटेंशन से पीड़ित मरीज
- क्रॉनिक लंग डिजीज वाले मरीज
- किडनी की बीमारी से जूझ रहे लोग
- गंभीर मोटापे से ग्रस्त लोग
इन हाई-रिस्क ग्रुप के लोगों में फ्लू होने पर जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए तेज बुखार या सांस से जुड़े लक्षण नजर आने पर डॉक्टर से समय पर सलाह लेना जरूरी है।
कोविड और स्वाइन फ्लू में क्या अंतर?
कोविड-19 और इन्फ्लुएंजा दोनों में बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना या बंद होना, सिरदर्द, शरीर में दर्द और थकान जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। यही वजह है कि केवल लक्षण देखकर यह बताना मुश्किल हो सकता है कि व्यक्ति को कोविड है या फ्लू।
कोविड के शुरुआती दौर में स्वाद और गंध चले जाना एक चर्चित लक्षण था, लेकिन अब हर कोविड मरीज में यह लक्षण दिखाई दे, यह जरूरी नहीं है। इसलिए स्वाद और गंध सामान्य रहने पर भी कोविड संक्रमण की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता।
जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से कोविड या इन्फ्लुएंजा की जांच कराई जा सकती है। खासतौर पर हाई-रिस्क मरीजों में संक्रमण की सही पहचान और समय पर उपचार महत्वपूर्ण है।
बचाव के लिए क्या करें?
फ्लू जैसे संक्रमण से बचने के लिए हाथों की नियमित सफाई, बीमार व्यक्ति से उचित दूरी, भीड़भाड़ वाली जगहों पर सावधानी और खांसते-छींकते समय मुंह-नाक ढकने जैसी आदतें अपनाना उपयोगी हो सकता है। अगर तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी या हालत बिगड़ने जैसे लक्षण हों तो खुद से दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।

