राजगढ़ में बेटी की बिंदौरी बनी मिसाल, पिता ने घोड़ी पर बैठाकर निकाला जुलूस, वीडियो वायरल
मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिला से एक भावुक और प्रेरणादायक मामला सामने आया है, जहां एक पिता ने अपनी बेटी की शादी में परंपरा को नया रूप देते हुए उसे घोड़ी पर बैठाकर बिंदौरी निकाली। इस अनोखी रस्म का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इसकी जमकर सराहना कर रहे हैं।
यह घटना राजगढ़ जिले के माचलपुर से लगे डूंगरी गांव की है, जहां महेश पाटीदार ने अपनी बेटी शिवानी पाटीदार की शादी से पहले बिंदौरी (जुलूस) निकाली। आमतौर पर यह परंपरा दूल्हों के लिए निभाई जाती है, जिसमें उन्हें घोड़ी पर बैठाकर बैंड-बाजे और नाच-गाने के साथ गांव में घुमाया जाता है। लेकिन इस बार एक बेटी को दूल्हे की तरह सम्मान देने की यह पहल चर्चा का विषय बन गई।
बेटी को मिला दुल्हन नहीं, रानी जैसा सम्मान
शिवानी पाटीदार ने बताया कि उनके पिता ने उनकी शादी में किसी भी तरह की कमी नहीं छोड़ी। उन्होंने न केवल घोड़ी और बैंड-बाजे की व्यवस्था की, बल्कि पारंपरिक पकवान और भव्य आयोजन भी कराया। शिवानी ने कहा कि घोड़ी पर बैठकर जुलूस में शामिल होना उनके लिए बेहद खास और यादगार अनुभव था। उन्होंने इसे “रानी जैसी फीलिंग” बताया।
शिवानी ने भावुक होकर कहा कि उनके माता-पिता ने उन्हें हमेशा बेटी नहीं, बल्कि बेटे की तरह पाला और हर सपने को पूरा किया। शादी के दौरान मिली यह विदाई उनके लिए बेहद भावनात्मक और गर्व का क्षण था।
पिता ने तोड़ी पुरानी सोच
दुल्हन के पिता महेश पाटीदार ने कहा कि समाज में अब बदलाव आ रहा है और बेटियां किसी भी क्षेत्र में बेटों से कम नहीं हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपनी बेटी को हमेशा बेटे की तरह पाला है और उसके हर फैसले में साथ दिया है।
महेश पाटीदार ने कहा, “बेटियां आज हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, इसलिए उन्हें कमतर समझना गलत है। मेरी बेटी मेरे लिए बेटे से भी बढ़कर है।”
ढोल-नगाड़ों पर झूमे लोग
बिंदौरी के दौरान शिवानी पाटीदार सजी-धजी घोड़ी पर बैठकर गांव में निकलीं। इस दौरान रिश्तेदारों, दोस्तों और गांव के लोगों ने ढोल-नगाड़ों और डीजे की धुन पर जमकर डांस किया। पूरा माहौल उत्सव जैसा बन गया।
सोशल मीडिया पर चर्चा
इस अनोखी बिंदौरी का वीडियो सामने आने के बाद लोग सोशल मीडिया पर इसकी खूब तारीफ कर रहे हैं। कई लोग इसे बदलते समाज की सोच और बेटियों को बराबरी का दर्जा देने का बेहतरीन उदाहरण बता रहे हैं।
एक नई सोच की शुरुआत
यह घटना सिर्फ एक शादी की रस्म नहीं, बल्कि समाज में बदलते नजरिए का प्रतीक बन गई है। जहां पहले बेटियों को कई परंपराओं से दूर रखा जाता था, वहीं अब उन्हें बराबरी और सम्मान के साथ हर रस्म में शामिल किया जा रहा है।
राजगढ़ की यह बिंदौरी इस बात का संदेश देती है कि जब सोच बदलती है, तो परंपराएं भी सम्मान और बराबरी का नया रूप ले लेती हैं।

