उत्तरकाशी: उत्तराखंड के प्रसिद्ध दयारा बुग्याल ट्रैक से लापता हुई 23 वर्षीय एमबीए छात्रा बबीता पांडे का 12 दिन बाद भी कोई पता नहीं चल सका है। लगातार चल रहे सर्च ऑपरेशन के बावजूद अब तक जांच एजेंसियों को कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा है। मामले ने पूरे राज्य में चिंता बढ़ा दी है, जबकि परिवार की उम्मीदें हर गुजरते दिन के साथ कमजोर पड़ती जा रही हैं।
बबीता पांडे नैनीताल जिले के रामनगर क्षेत्र स्थित चिल्किया गांव की रहने वाली हैं। वह अपने दो दोस्तों के साथ ट्रेकिंग के लिए उत्तरकाशी पहुंची थीं। जानकारी के अनुसार, तीनों ने 28 मई को रैथल गांव में रुककर रात बिताई थी। अगले दिन वे दयारा बुग्याल ट्रैक के लिए रवाना हुए और गोई बेस कैंप पहुंचे, जहां उन्होंने रात गुजारी।
पुलिस को दिए गए बयान में बबीता के साथ मौजूद दोस्तों ने बताया कि 29 मई की रात वह किसी समय टेंट से बाहर निकली थीं, लेकिन इसके बाद वापस नहीं लौटीं। जब काफी देर तक वह नहीं लौटीं तो उनकी तलाश शुरू की गई, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। इसके बाद मामले की सूचना प्रशासन और पुलिस को दी गई।
लापता छात्रा की तलाश के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाया जा रहा है। SDRF, NDRF, ITBP, स्थानीय पुलिस और वन विभाग की टीमें लगातार सर्च ऑपरेशन में जुटी हुई हैं। करीब 100 से अधिक जवान कठिन पर्वतीय इलाकों में तलाशी अभियान चला रहे हैं। इसके अलावा ड्रोन, डॉग स्क्वॉड और हवाई निगरानी की भी मदद ली जा रही है। बावजूद इसके अभी तक बबीता के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई है।
जांच के दौरान एक और बड़ा खुलासा सामने आया है। अधिकारियों के अनुसार, जिस ट्रेकिंग एजेंसी के माध्यम से बबीता और उनके साथी ट्रेक पर गए थे, उसने कथित तौर पर फर्जी परमिट का इस्तेमाल किया था। जिला पर्यटन विभाग की जांच में पाया गया कि ट्रेकर्स के नाम आधिकारिक डिजिटल पोर्टल पर दर्ज नहीं थे और आवश्यक अनुमति प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था। इस मामले के सामने आने के बाद संबंधित ट्रेकिंग एजेंसी का पंजीकरण तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए बबीता के दोनों साथियों से भी विस्तृत पूछताछ की है। अधिकारियों का कहना है कि सभी संभावित पहलुओं की जांच की जा रही है और किसी भी संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है। ट्रेकिंग एजेंसी के गाइड और अन्य संबंधित लोगों से भी पूछताछ जारी है।
बबीता अपने परिवार की सबसे बड़ी संतान हैं और उनके दो छोटे भाई हैं। परिवार के सदस्य लगातार उत्तरकाशी में डेरा डाले हुए हैं और खोज अभियान पर नजर बनाए हुए हैं। बबीता की मां ने भावुक होकर बताया कि उनकी बेटी को ट्रेकिंग और पहाड़ों में घूमने का शौक था। वह पहले भी उत्तराखंड के विभिन्न इलाकों की यात्रा कर चुकी थी।
फिलहाल प्रशासन का कहना है कि खोज अभियान पूरी ताकत के साथ जारी रहेगा। परिवार और स्थानीय लोग भी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि जल्द ही बबीता के बारे में कोई महत्वपूर्ण जानकारी सामने आएगी और इस रहस्य से पर्दा उठ सकेगा।

