कोटा/गंजम: सफलता केवल प्रतिभा का परिणाम नहीं होती, बल्कि इसके पीछे संघर्ष, समर्पण और अपनों का त्याग भी छिपा होता है। ओडिशा के गंजम जिले के छोटे से गांव बाकलीकोड़ा के रहने वाले जिगर नायक की कहानी इसी बात का जीवंत उदाहरण है। आर्थिक तंगी, पिता की असमय मृत्यु और तमाम मुश्किलों के बावजूद जिगर ने हार नहीं मानी और अब वह अपने परिवार तथा गांव का पहला IITian बनने की ओर अग्रसर है।
कोटा में दो वर्षों तक कठिन परिश्रम करने वाले जिगर नायक ने जेईई-एडवांस्ड परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 17,783 तथा ओबीसी-एनसीएल श्रेणी में 4,597वीं रैंक हासिल की है। इससे पहले उन्होंने जेईई-मेन में 98.6143 पर्सेंटाइल स्कोर किया था। जिगर की शैक्षणिक उपलब्धियां भी शानदार रही हैं। उन्होंने 10वीं कक्षा में 95 प्रतिशत और 12वीं में 87 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे।
हालांकि जिगर की सफलता के पीछे सबसे बड़ी भूमिका उनकी मां अपूर्वा नायक की रही है, जिन्होंने हर कठिन परिस्थिति में बेटे का साथ दिया और उसके सपनों को टूटने नहीं दिया। जिगर के पिता जूरीनाथ नायक गुजरात की एक टेक्सटाइल इंडस्ट्री में काम करते थे। परिवार का जीवन सामान्य रूप से चल रहा था, लेकिन अचानक उन्हें कैंसर होने का पता चला। इलाज के दौरान परिवार की वर्षों की जमा पूंजी खर्च हो गई। लंबी बीमारी से जूझने के बाद वर्ष 2020 में उनका निधन हो गया।
पिता के निधन के बाद परिवार पर संकटों का पहाड़ टूट पड़ा। आर्थिक स्थिति पहले से कमजोर थी और घर की जिम्मेदारियां पूरी तरह मां अपूर्वा के कंधों पर आ गईं। ऐसी परिस्थितियों में अधिकांश लोग अपने सपनों से समझौता कर लेते हैं, लेकिन अपूर्वा ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने यह संकल्प लिया कि चाहे कितनी भी कठिनाइयां क्यों न आएं, बेटे की शिक्षा और उसके भविष्य के साथ कोई समझौता नहीं होगा।
अपूर्वा नायक ने परिवार चलाने और बेटे की पढ़ाई जारी रखने के लिए दिन-रात मेहनत की। उन्होंने गोल्ड लोन लिया और घर-घर से सिलाई का काम लेकर टेलरिंग शुरू की। सिलाई मशीन पर घंटों मेहनत कर वे घर का खर्च चलातीं और बेटे की पढ़ाई के लिए पैसे बचातीं। कई बार आर्थिक परेशानियां इतनी बढ़ जाती थीं कि परिवार का गुजारा करना भी मुश्किल हो जाता था, लेकिन उन्होंने कभी जिगर को इन चुनौतियों का बोझ महसूस नहीं होने दिया।
दूसरी ओर, जिगर भी अपनी मां के संघर्ष को समझता था। उसने पढ़ाई को ही अपनी प्राथमिकता बनाया और कोटा में रहकर पूरी लगन के साथ जेईई की तैयारी की। दो वर्षों की कड़ी मेहनत और लगातार प्रयासों का परिणाम आखिरकार सफलता के रूप में सामने आया।
आज जिगर नायक की उपलब्धि केवल एक छात्र की सफलता नहीं है, बल्कि यह उस मां के त्याग, समर्पण और अटूट विश्वास की जीत भी है जिसने विपरीत परिस्थितियों में भी उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा। जिगर की कहानी उन लाखों छात्रों और अभिभावकों के लिए प्रेरणा है जो कठिन हालात के बावजूद बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस रखते हैं। यह सफलता साबित करती है कि मजबूत इरादों और परिवार के समर्थन से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता।

