शेयर बाजार में भारी गिरावट: सेंसेक्स 700 अंक टूटा, निफ्टी 24,200 के नीचे फिसला
गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत निवेशकों के लिए निराशाजनक रही। वैश्विक संकेतों की कमजोरी, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और अंतरराष्ट्रीय तनाव के चलते बाजार खुलते ही दबाव में आ गया। कारोबार की शुरुआत में ही BSE Sensex 725 अंक से ज्यादा टूटकर 77,790 के स्तर पर आ गया, जबकि Nifty 50 भी 205 अंकों की गिरावट के साथ 24,173 पर कारोबार करता नजर आया।
शुरुआती कारोबार में दबाव साफ
ओपनिंग बेल के साथ ही बाजार में बिकवाली का दबाव दिखा। सेंसेक्स में 0.92% की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी करीब 0.84% नीचे फिसल गया। निफ्टी का 24,200 के नीचे आना निवेशकों के लिए एक अहम संकेत माना जा रहा है, क्योंकि यह स्तर हाल के दिनों में एक मजबूत सपोर्ट के तौर पर देखा जा रहा था।
हालांकि गिरावट के बीच भी बाजार पूरी तरह एकतरफा नहीं रहा। शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक करीब 1193 शेयरों में तेजी देखने को मिली, जबकि 1095 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। इससे यह संकेत मिलता है कि चुनिंदा सेक्टर्स में अभी भी निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है।
किन शेयरों में रही हलचल
गिरते बाजार के बीच कुछ शेयरों ने मजबूती दिखाई। Dr. Reddy’s Laboratories, ONGC, Jio Financial Services, Cipla और Bharat Electronics Limited जैसे शेयरों में खरीदारी देखने को मिली।
वहीं दूसरी ओर InterGlobe Aviation, UltraTech Cement, SBI Life Insurance, Asian Paints और Mahindra & Mahindra जैसे दिग्गज शेयरों में गिरावट ने बाजार पर अतिरिक्त दबाव बनाया।
कच्चे तेल की कीमतें बनी बड़ी वजह
इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल है। Brent Crude Oil 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जिससे महंगाई बढ़ने और भारत के चालू खाते के घाटे पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। भारत एक बड़ा तेल आयातक देश है, ऐसे में तेल की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार पर पड़ता है।
FII और DII की बिकवाली से बढ़ा दबाव
बाजार में गिरावट को और बढ़ाने में विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों की बिकवाली ने अहम भूमिका निभाई है। पिछले कारोबारी सत्र में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने 2,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने भी 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की बिकवाली की। इससे बाजार में भरोसा कमजोर हुआ और निवेशकों का रुझान सतर्कता की ओर बढ़ा।
वैश्विक तनाव का असर
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव का असर भी भारतीय बाजार पर साफ दिख रहा है। खासतौर पर Strait of Hormuz के आसपास जारी भू-राजनीतिक तनाव और Iran तथा United States के बीच बातचीत में ठहराव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक स्तर पर स्थिरता नहीं आती और कच्चे तेल की कीमतों में राहत नहीं मिलती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने और लंबी अवधि के नजरिए से निवेश करने की सलाह दी जा रही है।
फिलहाल, गुरुवार की शुरुआत ने यह साफ कर दिया है कि बाजार पर बाहरी कारकों का दबाव बना हुआ है और निकट भविष्य में अस्थिरता जारी रह सकती है।

