Iran–US Tension Escalates in Arabian Sea: Ceasefire Breakdown Triggers Fresh Conflict
अरब सागर में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है, जब ईरान और अमेरिका के बीच कथित युद्धविराम (सीजफायर) टूटने की खबर सामने आई है। हालिया घटनाक्रम में अमेरिकी सेना ने एक ईरानी कार्गो जहाज को रोककर अपने कब्जे में ले लिया, जिसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिकी सैन्य जहाजों पर ड्रोन हमले का दावा किया है। इस पूरे घटनाक्रम ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।
अमेरिका के सेंट्रल कमांड US Central Command (CENTCOM) के अनुसार, 19 अप्रैल को अरब सागर में एक ईरानी झंडे वाले कार्गो जहाज को रोका गया। यह जहाज ईरान के बंदर अब्बास बंदरगाह की ओर बढ़ रहा था और अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी का उल्लंघन कर रहा था। अमेरिकी गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर USS Spruance (DDG-111) ने इस जहाज को कई घंटों तक चेतावनी दी।
अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि लगभग छह घंटे तक बार-बार चेतावनी देने के बावजूद जहाज ने अपना रास्ता नहीं बदला। इसके बाद अमेरिकी नौसेना ने कार्रवाई करते हुए जहाज के इंजन रूम को निशाना बनाकर फायरिंग की, जिससे उसकी प्रोपल्शन प्रणाली निष्क्रिय हो गई। इसके बाद अमेरिकी मरीन बलों ने जहाज पर चढ़कर उसे अपने नियंत्रण में ले लिया। फिलहाल यह जहाज अमेरिकी हिरासत में बताया जा रहा है।
इस घटना के बाद ईरान ने कड़ा रुख अपनाते हुए अमेरिकी सैन्य जहाजों पर ड्रोन हमले का दावा किया है। हालांकि इन हमलों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है, लेकिन ईरान के इस बयान ने क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है। ईरान ने इसे अमेरिकी “आक्रामकता” का जवाब बताया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह टकराव रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील क्षेत्र Strait of Hormuz (होर्मुज जलडमरूमध्य) के पास हुआ है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का एक प्रमुख मार्ग है। यहां किसी भी प्रकार का सैन्य संघर्ष अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा बाजारों पर गंभीर असर डाल सकता है।
अमेरिका ने अपने बयान में कहा है कि यह कार्रवाई “सोच-समझकर, पेशेवर और समानुपातिक” तरीके से की गई, और इसका उद्देश्य केवल नाकेबंदी को लागू करना था। CENTCOM के अनुसार, नाकेबंदी शुरू होने के बाद से अब तक 25 से अधिक वाणिज्यिक जहाजों को या तो मार्ग बदलने या ईरानी बंदरगाहों की ओर लौटने के निर्देश दिए गए हैं।
वहीं, अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस बढ़ते तनाव पर नजर बनाए हुए है। कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। यदि हालात ऐसे ही बिगड़ते रहे, तो यह टकराव बड़े क्षेत्रीय संघर्ष में बदल सकता है।
फिलहाल स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है और आने वाले दिनों में दोनों देशों के कदम इस संकट की दिशा तय करेंगे।

