North Korea Conducts Back-to-Back Missile Tests Amid Rising Iran–US Tensions
सियोल: वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच उत्तर कोरिया ने लगातार दूसरे दिन बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण कर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। Kim Jong Un के नेतृत्व वाले देश ने इस बार क्लस्टर बम वारहेड से लैस मिसाइल का परीक्षण किया, जिससे South Korea, Japan और United States समेत कई देशों में हलचल मच गई है। यह घटनाक्रम ऐसे समय पर हुआ है जब Iran और United States के बीच संघर्ष फिर से भड़कने की आशंका जताई जा रही है।
उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी Korean Central News Agency (KCNA) के अनुसार, देश ने रविवार के बाद सोमवार को भी मिसाइल परीक्षण जारी रखा। रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्वी तट से कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं, जिन्हें क्षेत्रीय निगरानी प्रणालियों ने तुरंत डिटेक्ट कर लिया। इसके बाद अगले चरण में क्लस्टर बम वारहेड से लैस मिसाइल का सफल परीक्षण किया गया।
KCNA द्वारा जारी तस्वीरों में Kim Jong Un अपनी बेटी Kim Ju Ae के साथ लॉन्च स्थल पर मौजूद नजर आए। दोनों को काले चमड़े के जैकेट में मिसाइल लॉन्च का निरीक्षण करते देखा गया। विश्लेषकों का मानना है कि किम जू ए की लगातार सार्वजनिक मौजूदगी इस बात का संकेत हो सकती है कि उन्हें भविष्य के उत्तराधिकारी के रूप में तैयार किया जा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, इस परीक्षण में अपग्रेडेड Hwasong-11 मिसाइल का इस्तेमाल किया गया, जिसमें क्लस्टर बम और फ्रैगमेंटेशन माइन वारहेड शामिल थे। मिसाइलों ने कथित तौर पर समुद्र में स्थित एक द्वीप लक्ष्य को सफलतापूर्वक निशाना बनाया। परीक्षण के बाद किम जोंग उन ने संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि यह क्षमता “उच्च घनत्व वाले हमलों” के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
इस महीने की शुरुआत में भी उत्तर कोरिया ने इसी प्रकार की क्लस्टर वारहेड मिसाइल का परीक्षण किया था। उस समय दावा किया गया था कि यह हथियार 6.5 से 7 हेक्टेयर क्षेत्र को पूरी तरह तबाह कर सकता है। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय तनाव, खासकर मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष, उत्तर कोरिया को अपनी सैन्य ताकत प्रदर्शित करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
क्लस्टर मुनिशन्स को दुनिया के सबसे खतरनाक हथियारों में गिना जाता है। ये मिसाइलें हवा में फटकर दर्जनों छोटे बमलेट्स को बड़े क्षेत्र में फैला देती हैं, जिससे व्यापक विनाश होता है और नागरिकों के लिए भी गंभीर खतरा पैदा होता है। यही कारण है कि 120 से अधिक देशों ने इनके उपयोग पर प्रतिबंध लगाने वाली संधि पर हस्ताक्षर किए हैं, हालांकि उत्तर कोरिया, ईरान, इजरायल और अमेरिका इस संधि का हिस्सा नहीं हैं।
विश्लेषकों का यह भी कहना है कि 2019 में Donald Trump और किम जोंग उन के बीच परमाणु वार्ता विफल होने के बाद उत्तर कोरिया ने अपने हथियार कार्यक्रम को तेज कर दिया है। इसमें मल्टी-वारहेड परमाणु मिसाइलें, हाइपरसोनिक हथियार और पनडुब्बी से लॉन्च होने वाली मिसाइलों का विकास शामिल है।
वर्तमान हालात में उत्तर कोरिया के ये परीक्षण न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए चुनौती हैं, बल्कि वैश्विक स्थिरता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कूटनीतिक प्रयास तेज नहीं किए गए, तो यह तनाव बड़े सैन्य टकराव में बदल सकता है।

