“INDIA गठबंधन की बैठक से पहले तमिलनाडु की राजनीति ने नया मोड़ ले लिया है। विपक्षी एकता के दावों के बीच अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी TVK को बैठक का निमंत्रण नहीं मिलने से सियासी गलियारों में कई सवाल खड़े हो गए हैं। क्या INDIA गठबंधन में नए सहयोगियों के लिए जगह नहीं है, या फिर इसके पीछे कोई बड़ी राजनीतिक रणनीति काम कर रही है?
दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में आयोजित INDIA ब्लॉक की अहम बैठक में देशभर के 23 विपक्षी दलों के शामिल होने का दावा किया गया है। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल और कई अन्य दलों के शीर्ष नेता इस बैठक में मौजूद हैं। लेकिन तमिलनाडु की राजनीति में तेजी से उभर रही तमिलगा वेत्री कझगम यानी TVK की गैरमौजूदगी चर्चा का बड़ा विषय बन गई है।
कांग्रेस का कहना है कि जिन दलों का संसद में प्रतिनिधित्व नहीं है, उन्हें इस बैठक में आमंत्रित नहीं किया गया। चूंकि TVK एक नई राजनीतिक पार्टी है और उसके पास अभी कोई सांसद नहीं है, इसलिए उसे निमंत्रण नहीं भेजा गया। लेकिन राजनीतिक जानकार इस तर्क को पूरी तरह स्वीकार नहीं कर रहे हैं। उनका मानना है कि तमिलनाडु में TVK का बढ़ता प्रभाव और कांग्रेस के साथ उसकी बढ़ती नजदीकियां भविष्य की राजनीति को प्रभावित कर सकती हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक और बड़ा मोड़ तब आया जब DMK ने INDIA गठबंधन से दूरी बना ली। कांग्रेस पर राजनीतिक विश्वासघात का आरोप लगाते हुए डीएमके ने न सिर्फ बैठक का बहिष्कार किया, बल्कि भविष्य में गठबंधन की बैठकों में शामिल न होने का संकेत भी दे दिया। ऐसे में विपक्षी एकता की तस्वीर उतनी मजबूत नजर नहीं आ रही, जितनी दिखाई जा रही है।
बैठक में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव और सुप्रिया सुले जैसे बड़े चेहरे मौजूद हैं। वहीं उद्धव ठाकरे और उनके सहयोगी वर्चुअल माध्यम से बैठक में हिस्सा ले रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि जब सहयोगी दल ही नाराज हैं और नए राजनीतिक सहयोगियों को मंच पर जगह नहीं मिल रही, तो क्या विपक्ष भाजपा के खिलाफ एकजुट मोर्चा तैयार कर पाएगा?
TVK को निमंत्रण न मिलना सिर्फ एक औपचारिक मुद्दा नहीं, बल्कि विपक्षी राजनीति के भविष्य से जुड़ा बड़ा संकेत माना जा रहा है। क्या विजय की बढ़ती लोकप्रियता कुछ दलों के लिए असहजता का कारण बन रही है? क्या INDIA गठबंधन तमिलनाडु में अपनी नई राजनीतिक दिशा तय कर रहा है? और सबसे बड़ा सवाल—क्या यह बैठक विपक्षी एकता को मजबूत करेगी या अंदरूनी मतभेदों को और उजागर करेगी?
फिलहाल देश की नजरें दिल्ली में हो रही इस बैठक पर टिकी हैं, जहां लिए गए फैसले आने वाले दिनों की राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं।”**

