भारतीय प्रशासनिक सेवा जैसी प्रतिष्ठित सरकारी नौकरी हासिल करना लाखों युवाओं का सपना होता है। लेकिन आंध्र प्रदेश के वडलामणि सत्य साईं श्रीनिवास ने अपने जीवन में एक ऐसा फैसला लिया, जिसने उनकी पूरी जिंदगी की दिशा बदल दी। करीब 23 साल तक सरकारी सेवा में रहने और ज्वाइंट कलेक्टर जैसे महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी संभालने के बाद उन्होंने अभिनय की दुनिया को अपना करियर बना लिया। आज वह तेलुगु सिनेमा के चर्चित कैरेक्टर आर्टिस्ट के तौर पर अपनी पहचान बना चुके हैं और 70 से अधिक फिल्मों में काम कर चुके हैं।
किसान परिवार में हुआ जन्म
वडलामणि सत्य साईं श्रीनिवास का जन्म आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले के नंदांपुडी गांव में एक किसान परिवार में हुआ। पढ़ाई में उनकी शुरुआत से ही गहरी रुचि थी। उन्होंने अमलापुरम से गणित विषय में बीएससी की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उस्मानिया यूनिवर्सिटी से प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति और कला में एमए किया। उन्होंने सोशल हिस्ट्री में पीएचडी भी पूरी की।
श्रीनिवास ने यूपीएससी और आंध्र प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षाएं पास कीं। बताया जाता है कि उन्होंने यूपीएससी परीक्षा अपने पहले ही प्रयास में सफलतापूर्वक पास की थी। इसके बाद उन्होंने प्रशासनिक सेवा में अपना करियर शुरू किया और डिप्टी कलेक्टर से लेकर ज्वाइंट कलेक्टर जैसे अहम पदों तक पहुंचे।
सरकारी नौकरी के साथ फिल्मों में एंट्री
प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच श्रीनिवास का कला और फिल्मों के प्रति लगाव भी बना रहा। हालांकि उन्होंने कभी अभिनेता बनने की योजना नहीं बनाई थी, लेकिन एक संयोग ने उन्हें कैमरे के सामने पहुंचा दिया।
पारिवारिक मित्र और निर्देशक कल्याण कृष्ण ने उन्हें फिल्म ‘रा रंडोई वेडुका चुद्दाम’ में एक छोटी भूमिका निभाने का मौका दिया। यह रोल भले ही छोटा था, लेकिन इसके बाद श्रीनिवास के भीतर अभिनय को लेकर रुचि बढ़ने लगी। इसके बाद निर्देशक मारुति ने उन्हें ‘महानुभावुडु’ में काम करने का अवसर दिया।
इन फिल्मों में दिखा चुके हैं अभिनय
धीरे-धीरे श्रीनिवास तेलुगु फिल्मों में अपनी अलग पहचान बनाने लगे। उन्होंने ‘गीता गोविंदम’, ‘V’, ‘मंची रोजुलोचई’, ‘F2’ और ‘खुशी’ जैसी फिल्मों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। उनकी खासियत यह रही कि उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदारों को सहजता से पर्दे पर उतारा।
प्रशासनिक अधिकारी के तौर पर लंबे समय तक काम करने के कारण उनके व्यक्तित्व में जो गंभीरता और अनुभव आया, उसका फायदा उन्हें अभिनय में भी मिला। यही वजह है कि उन्हें फिल्मों में कैरेक्टर रोल के लिए पसंद किया जाने लगा।
23 साल की सेवा के बाद लिया बड़ा फैसला
सरकारी सेवा में 23 साल बिताने के बाद श्रीनिवास ने अभिनय को पूरी तरह अपनाने का फैसला किया। ज्वाइंट कलेक्टर जैसे प्रतिष्ठित पद और सरकारी सुविधाओं को छोड़कर फिल्म इंडस्ट्री में करियर बनाना आसान फैसला नहीं था। लेकिन उन्होंने अपने जुनून को प्राथमिकता दी।
आज वह टॉलीवुड के व्यस्त अभिनेताओं में गिने जाते हैं। उनकी कहानी यह बताती है कि करियर में किसी मुकाम तक पहुंचने के बाद भी अगर मन में किसी दूसरे क्षेत्र के लिए जुनून हो, तो साहस के साथ नई शुरुआत की जा सकती है।

