मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में बुधवार, 2 सितंबर को एक बार फिर भारी बिकवाली देखने को मिली। कमजोर वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। पूरे कारोबारी सत्र में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहा, लेकिन कारोबार खत्म होने तक दोनों प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। ऑटो, आईटी और मीडिया शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला।
सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गिरावट
बुधवार को कारोबार समाप्त होने पर सेंसेक्स 373.93 अंक यानी 0.49 फीसदी गिरकर 76,570.35 अंक पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 141.35 अंक यानी 0.59 फीसदी की गिरावट के साथ 23,914.45 अंक के स्तर पर पहुंच गया।
बाजार में बिकवाली का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि करीब 2323 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए, जबकि लगभग 1827 शेयरों में तेजी दर्ज की गई। इससे साफ है कि व्यापक बाजार में निवेशकों का रुख बुधवार को काफी सतर्क रहा।
ऑटो और आईटी शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव
सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो एनर्जी और ऑयल एंड गैस को छोड़कर लगभग सभी प्रमुख सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए। ऑटो, आईटी और मीडिया सेक्टर में 1.2 से 1.8 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा निफ्टी मिडकैप में करीब 0.5 फीसदी और स्मॉलकैप में 0.4 फीसदी की कमजोरी रही।
दिग्गज शेयरों में एशियन पेंट्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, इंफोसिस और टीसीएस समेत कई कंपनियों के शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। एशियन पेंट्स में 1.61 फीसदी, महिंद्रा एंड महिंद्रा में 1.56 फीसदी, इंफोसिस में 1.28 फीसदी और टीसीएस में 0.89 फीसदी की गिरावट रही।
अडानी पोर्ट्स समेत इन शेयरों में तेजी
चौतरफा दबाव के बावजूद कुछ शेयरों ने बाजार में मजबूती दिखाई। अडानी पोर्ट्स 1.63 फीसदी की बढ़त के साथ 1672.90 रुपये पर बंद हुआ और प्रमुख सूचकांक में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले शेयरों में शामिल रहा।
इसके अलावा बजाज फिनसर्व में 1.02 फीसदी, पावर ग्रिड में 1 फीसदी, एनटीपीसी में 0.96 फीसदी और रिलायंस इंडस्ट्रीज में 0.44 फीसदी की तेजी दर्ज की गई। टाइटन के शेयर में भी करीब 1.70 फीसदी की बढ़त देखने को मिली।
कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता
बाजार में गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजहों में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी को माना जा रहा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान से जुड़ी सैन्य गतिविधियों की खबरों के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 1 फीसदी बढ़कर 95.4 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई।
महंगे कच्चे तेल से भारत जैसे बड़े आयातक देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। यही वजह है कि निवेशकों के बीच चिंता बढ़ी और बाजार में बिकवाली तेज हुई।
वैश्विक बाजारों की कमजोरी का भी असर
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे रहने की आशंका ने भी निवेशकों का भरोसा प्रभावित किया। इसके अलावा एशियाई बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली। दक्षिण कोरिया का कोस्पी करीब 3 फीसदी और जापान का निक्केई 225 लगभग 3 फीसदी तक गिरा। वैश्विक बाजारों के इस कमजोर माहौल का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा।

