शिमला: हिमाचल प्रदेश सरकार राज्य में नौकरशाही से जुड़े खर्च को कम करने के लिए भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय वन सेवा (IFS) और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारियों की संख्या घटाने की दिशा में काम कर रही है। सरकार का मानना है कि राज्य की जरूरत के मुकाबले कुछ सेवाओं में अधिकारियों के पद अधिक हैं। ऐसे में कैडर का पुनर्गठन कर राजस्व खर्च को कम करने की कोशिश की जा रही है।
राज्य सरकार की योजना के तहत IAS कैडर को मौजूदा 153 पदों से घटाकर 130 करने का प्रस्ताव है। वहीं IFS कैडर में भी बड़ी कटौती की तैयारी है। हालांकि IPS अधिकारियों की संख्या में कितनी कमी की जाएगी, इस पर अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
IAS कैडर को 130 तक लाने की तैयारी
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में IAS अधिकारियों के कुल 153 पद हैं। सरकार ने इसे घटाकर 130 करने की दिशा में कदम उठाया है। हालांकि उनका व्यक्तिगत विचार है कि भविष्य में IAS कैडर को और कम करके करीब 110 तक किया जाना चाहिए।
सरकार का तर्क है कि अधिकारियों की संख्या में कमी करने से प्रशासनिक व्यवस्था की जरूरतों के अनुसार पदों का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकेगा। साथ ही इससे सरकार के राजस्व खर्च पर भी दबाव कम होगा।
IFS कैडर में भी होगी बड़ी कटौती
IAS के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश में IFS अधिकारियों के कैडर को भी छोटा करने का प्रस्ताव है। वर्तमान में राज्य में IFS के करीब 118 पद हैं, जिन्हें घटाकर 83 करने की योजना है।
इस तरह IFS कैडर में करीब 35 पदों की कमी की जाएगी। सरकार का मानना है कि राज्य में उपलब्ध प्रशासनिक और वन सेवाओं के पदों की मौजूदा संख्या को जरूरत के मुताबिक व्यवस्थित करने से सरकारी संसाधनों की बचत की जा सकती है।
IPS अधिकारियों की संख्या पर फैसला बाकी
पुलिस सेवा के अधिकारियों को लेकर भी सरकार कैडर की समीक्षा कर रही है। हालांकि IPS अधिकारियों की संख्या में कितनी कमी की जाएगी, इस बारे में अभी कोई अंतिम संख्या तय नहीं की गई है।
सरकार की ओर से संकेत दिया गया है कि प्रशासनिक जरूरतों, कार्यभार और वित्तीय स्थिति का आकलन करने के बाद इस संबंध में फैसला लिया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जरूरी प्रशासनिक और पुलिस सेवाओं पर असर डाले बिना खर्च में कटौती की जा सके।
100 से 150 करोड़ रुपये की बचत का दावा
मुख्यमंत्री के मुताबिक IAS कैडर को कम करने की प्रक्रिया से सरकार के राजस्व खर्च में करीब 100 से 150 करोड़ रुपये की कमी आई है। सरकार आर्थिक दबाव के बीच अपने गैर-जरूरी खर्चों को कम करने पर लगातार जोर दे रही है।
राज्य पर वित्तीय दबाव को देखते हुए सरकार प्रशासनिक ढांचे के साथ-साथ विभिन्न विभागों के खर्च की भी समीक्षा कर रही है। अधिकारियों के पदों और कैडर का पुनर्गठन इसी व्यापक वित्तीय रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
खर्च घटाने के साथ प्रशासनिक संतुलन की चुनौती
अधिकारियों की संख्या कम करने का फैसला सरकार के लिए आसान नहीं होगा। एक ओर इससे वेतन और प्रशासनिक खर्च में कमी आ सकती है, वहीं दूसरी ओर यह भी सुनिश्चित करना होगा कि सरकारी विभागों के कामकाज और जनता को मिलने वाली सेवाओं पर इसका नकारात्मक असर न पड़े।
सरकार का लक्ष्य सीमित संसाधनों में प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाना है। IAS और IFS कैडर में प्रस्तावित कटौती के बाद प्रशासनिक जरूरतों की समीक्षा की जाएगी। वहीं IPS कैडर को लेकर आगे होने वाला फैसला भी राज्य की कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर लिया जाएगा।
हिमाचल सरकार की यह पहल फिलहाल खर्च में कटौती और सरकारी संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल पर केंद्रित है। आने वाले समय में कैडर पुनर्गठन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य के प्रशासनिक ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

