3 Oct 2026, Sat

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पश्चिम बंगाल की राजनीति में 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान सामने आई ममता बनर्जी की पैर की चोट का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया है कि नंदीग्राम में चुनाव प्रचार के दौरान ममता बनर्जी ने पैर में चोट लगने की घटना को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया था। उन्होंने दावा किया कि उनके पास उस समय की मेडिकल रिपोर्ट मौजूद है और इस मामले की जांच कराई जाएगी।

सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि मौजूदा समय में उपचुनाव के कारण आदर्श आचार संहिता लागू है, इसलिए वह इस मामले से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी बाद में सार्वजनिक करेंगे। उनके मुताबिक, 9 अक्टूबर के बाद इस मामले में आगे की जानकारी सामने रखी जाएगी।

2021 में नंदीग्राम में घायल हुई थीं ममता

दरअसल, 10 मार्च 2021 को विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान नंदीग्राम के बिरुलिया इलाके में ममता बनर्जी के बाएं पैर में चोट लगी थी। उस समय उन्होंने आरोप लगाया था कि भीड़ के बीच कुछ लोगों ने उन्हें धक्का दिया, जिसके कारण वह अपनी कार के खुले दरवाजे से टकरा गईं और उनके पैर में चोट लगी।

बाद में उन्हें इलाज के लिए कोलकाता के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उस समय सामने आई चिकित्सकीय जानकारी में उनके बाएं टखने और पैर में गंभीर चोटों के साथ शरीर के कुछ अन्य हिस्सों में भी चोट का उल्लेख किया गया था। इलाज के बाद उन्हें पैर पर प्लास्टर के साथ अस्पताल से छुट्टी दी गई थी और इसके बाद उन्होंने व्हीलचेयर पर चुनाव प्रचार भी किया था।

मेडिकल रिपोर्ट को लेकर अधिकारी का दावा

सुवेंदु अधिकारी का कहना है कि उनके पास मौजूद मेडिकल दस्तावेज में पैर में फ्रैक्चर या हड्डी खिसकने का कोई प्रमाण नहीं है। इसी आधार पर उन्होंने घटना की परिस्थितियों और उस समय किए गए दावों की जांच कराने की बात कही है। उन्होंने यह भी कहा कि जांच के दौरान उपलब्ध दस्तावेजों और उस समय की परिस्थितियों की पड़ताल की जाएगी।

हालांकि, इस दावे को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आ सकता है। किसी आरोप या मेडिकल दस्तावेज की एक व्याख्या को अपने आप अंतिम तथ्य नहीं माना जा सकता।

तृणमूल कांग्रेस ने आरोपों को खारिज किया

सुवेंदु अधिकारी के आरोपों पर तृणमूल कांग्रेस की ओर से आपत्ति जताई गई है। पार्टी नेता कुणाल घोष ने दावा किया कि चोट लगने के लिए फ्रैक्चर होना जरूरी नहीं है और बिना फ्रैक्चर के भी किसी व्यक्ति को गंभीर चोट लग सकती है। उन्होंने मुख्यमंत्री के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि पूरे मामले को केवल फ्रैक्चर की मौजूदगी या अनुपस्थिति के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए।

इस तरह 2021 में हुई घटना को लेकर दो अलग-अलग दावे सामने हैं। एक तरफ सुवेंदु अधिकारी मेडिकल दस्तावेजों के आधार पर जांच की बात कर रहे हैं, जबकि दूसरी तरफ तृणमूल कांग्रेस इन आरोपों को खारिज कर रही है। अब प्रस्तावित जांच में सामने आने वाले दस्तावेज और निष्कर्ष यह स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण होंगे कि उस समय की चोट की वास्तविक स्थिति क्या थी।

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