Share Market Crash: ईरान तनाव के बीच सेंसेक्स-निफ्टी में बड़ी गिरावट, निवेशकों को झटका
सोमवार, 30 मार्च 2026 को भारतीय शेयर बाजार ने भारी गिरावट के साथ हफ्ते की शुरुआत की। वैश्विक तनाव, खासकर Iran से जुड़ी ताजा घटनाओं का असर घरेलू बाजार पर साफ देखने को मिला। बाजार खुलते ही दोनों प्रमुख सूचकांक—BSE Sensex और Nifty 50—तेज गिरावट के साथ लाल निशान में कारोबार करते नजर आए।
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 1018 अंकों यानी 1.38% की गिरावट के साथ 72,565.22 के स्तर पर खुला। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 भी 269.95 अंकों यानी 1.18% टूटकर 22,549.65 पर खुला। इससे पहले शुक्रवार को भी बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी, जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई है।
आज की सबसे बड़ी बात यह रही कि सेंसेक्स की सभी 30 कंपनियों के शेयर गिरावट के साथ खुले। यह बाजार में व्यापक बिकवाली का संकेत देता है। वहीं निफ्टी 50 के 50 में से केवल 2 शेयर ही हरे निशान में रहे, जबकि बाकी 48 कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखी गई।
अगर प्रमुख कंपनियों के प्रदर्शन की बात करें, तो Axis Bank, Kotak Mahindra Bank, State Bank of India और HDFC Bank जैसे बैंकिंग शेयरों में भारी दबाव देखा गया। इसके अलावा Bharti Airtel, Reliance Industries और Tata Consultancy Services भी गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए।
आईटी सेक्टर में भी कमजोरी देखने को मिली, जहां Infosys और HCLTech के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। वहीं ऑटो और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की कंपनियां जैसे Mahindra & Mahindra और Maruti Suzuki भी दबाव में रहीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर वैश्विक बाजारों पर पड़ रहा है, जिसका प्रभाव भारतीय बाजार पर भी देखने को मिल रहा है। तेल की कीमतों में संभावित उछाल और सप्लाई चेन में अनिश्चितता ने निवेशकों के बीच घबराहट बढ़ा दी है।
इसके अलावा विदेशी निवेशकों की बिकवाली और रुपये में कमजोरी भी बाजार के लिए नकारात्मक संकेत दे रही है। निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपना रहे हैं और जोखिम वाले निवेश से दूरी बना रहे हैं।
मार्केट एनालिस्ट्स का कहना है कि जब तक वैश्विक हालात स्थिर नहीं होते, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। निवेशकों को इस समय जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना चाहिए और लंबी अवधि के निवेश पर ध्यान देना चाहिए।
कुल मिलाकर, सप्ताह की शुरुआत ने निवेशकों को बड़ा झटका दिया है और आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी।

