वैश्विक तनाव से शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, निवेशकों को भारी नुकसान
दुनिया भर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। शुक्रवार को घरेलू बाजार ने भारी गिरावट के साथ कारोबार की शुरुआत की, जिससे निवेशकों की लाखों करोड़ रुपये की पूंजी डूब गई। शुरुआती कारोबार में ही बाजार में बिकवाली का दबाव इतना अधिक रहा कि प्रमुख सूचकांक लाल निशान में फिसल गए।
सुबह 9:15 बजे के आसपास BSE Sensex करीब 646 अंक टूटकर 74,626 के स्तर पर आ गया, जबकि Nifty 50 भी 194 अंकों की गिरावट के साथ 23,112 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। बाजार में इस गिरावट की मुख्य वजह वैश्विक अनिश्चितता और निवेशकों का जोखिम से दूरी बनाना बताया जा रहा है।
सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो आईटी सेक्टर को छोड़कर लगभग सभी क्षेत्रों में गिरावट देखने को मिली। ऑटो, पीएसयू बैंक, एफएमसीजी, रियल्टी और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में 1 से 2 प्रतिशत तक की कमजोरी दर्ज की गई। हालांकि Tata Consultancy Services, HCL Technologies और Infosys जैसे आईटी शेयरों ने कुछ हद तक बाजार को सहारा देने की कोशिश की। इसके विपरीत Bajaj Finance, Larsen & Toubro और Reliance Industries जैसे दिग्गज शेयरों में भारी गिरावट देखी गई।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी दबाव बना रहा, जहां दोनों इंडेक्स लगभग 1-1 प्रतिशत नीचे कारोबार करते दिखे। इससे साफ है कि गिरावट केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे बाजार में व्यापक रूप से कमजोरी देखने को मिली।
वैश्विक बाजारों का रुख भी नकारात्मक रहा। एशियाई बाजारों में जापान का Nikkei 225 और दक्षिण कोरिया का KOSPI गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे। वहीं चीन का SSE Composite Index और हांगकांग का Hang Seng Index मामूली बढ़त के साथ ट्रेड कर रहे थे। अमेरिकी बाजारों में भी भारी गिरावट दर्ज की गई, जहां NASDAQ Composite 2.4 प्रतिशत तक टूट गया और ‘करेक्शन’ जोन में पहुंच गया। इसके अलावा Dow Jones Industrial Average और S&P 500 में भी बड़ी गिरावट देखी गई।
इस गिरावट का एक बड़ा असर भारतीय मुद्रा पर भी पड़ा है। शुक्रवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 94 के स्तर को पार कर गया और अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंताओं ने रुपये पर दबाव बढ़ा दिया है। पिछले एक महीने में ही रुपये में करीब 3.5 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक हालात के चलते बाजार में अभी और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है, क्योंकि भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा संकट और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता का असर बाजार पर आगे भी बना रह सकता है।
कुल मिलाकर, मौजूदा हालात ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है और बाजार में अस्थिरता का दौर जारी रहने के संकेत मिल रहे हैं।

