मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब वैश्विक बाजारों के साथ-साथ भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते टकराव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, जिसके चलते सोमवार को घरेलू बाजार भारी गिरावट के साथ खुले।
सुबह 9:15 बजे BSE Sensex करीब 1316 अंक टूटकर 73,216 के स्तर पर आ गया, जबकि Nifty 50 भी 420 अंक गिरकर 22,694 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। खास बात यह रही कि निफ्टी 50 अप्रैल 2025 के बाद पहली बार 23,000 के नीचे फिसल गया, जिससे बाजार में कमजोरी का संकेत मिला।
इस गिरावट के चलते निवेशकों के लाखों करोड़ रुपये डूब गए हैं। बाजार में बिकवाली का दबाव इतना ज्यादा था कि लगभग सभी सेक्टर लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। ऑटो, बैंकिंग, मेटल, मीडिया और पीएसयू बैंक सेक्टर में करीब 2 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई। वहीं मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी भारी बिकवाली देखने को मिली, जो 2 प्रतिशत से ज्यादा नीचे गिर गए।
बाजार की इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण मिडिल ईस्ट में जारी तनाव है। Strait of Hormuz को लेकर बढ़ते टकराव ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को चेतावनी दी है कि यदि 48 घंटे में जलडमरूमध्य पूरी तरह नहीं खोला गया तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके जवाब में ईरान ने भी सख्त रुख अपनाया है, जिससे हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं।
इस तनाव का असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी पड़ा है। हालांकि शुरुआती कारोबार में ब्रेंट क्रूड में हल्की गिरावट दर्ज की गई और यह 111 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहा, लेकिन कीमतें अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। इससे तेल आयात करने वाले देशों, खासकर भारत, पर दबाव बढ़ा है।
एशियाई बाजारों में भी भारी गिरावट देखने को मिली है। जापान और दक्षिण कोरिया के प्रमुख इंडेक्स 5 प्रतिशत से ज्यादा टूट गए, जिससे निवेशकों में घबराहट का माहौल बना हुआ है। वहीं अमेरिकी बाजार भी दबाव में नजर आए, जहां डॉव जोन्स, एसएंडपी 500 और नैस्डैक फ्यूचर्स लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं।
इस बीच भारतीय मुद्रा पर भी दबाव बढ़ गया है। रुपये में भारी गिरावट दर्ज की गई और यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93.94 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और मजबूत डॉलर के चलते रुपये पर दबाव बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक मिडिल ईस्ट में हालात सामान्य नहीं होते, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने और लंबी अवधि के नजरिए से निवेश करने की सलाह दी जा रही है। कुल मिलाकर, वैश्विक तनाव ने बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है, जिसका असर आने वाले दिनों में भी देखने को मिल सकता है।

