मुंबई: महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने स्कूलों में बच्चों को सुरक्षित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के लिए बड़ा फैसला लिया है। नए निर्देशों के तहत अब राज्य के सभी सरकारी और निजी स्कूलों के 50 मीटर के दायरे में हाई फैट, हाई शुगर और हाई सॉल्ट (HFSS) वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। इस श्रेणी में वड़ा पाव, बर्गर, कोल्ड ड्रिंक, मिठाइयां, आइसक्रीम और अन्य प्रोसेस्ड व पैकेज्ड फूड शामिल हैं।
FDA कमिश्नर तुकाराम मुंडे ने बताया कि यह नियम वर्ष 2020 में बनाया गया था, लेकिन इसका प्रभावी तरीके से पालन नहीं हो रहा था। अब 27 जुलाई 2026 को जारी आदेश के बाद इस नियम को पूरे राज्य में सख्ती से लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में करीब 1.08 लाख स्कूल हैं और सभी सरकारी तथा निजी स्कूलों को इन निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा।
मुंडे ने कहा कि बच्चों के लिए सही पोषण सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्कूलों के भीतर और उनके 50 मीटर के दायरे में HFSS खाद्य पदार्थों की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। उनके अनुसार अब किसी भी संस्थान या विक्रेता के लिए यह कहना पर्याप्त नहीं होगा कि उन्हें नियमों की जानकारी नहीं थी।
FDA ने स्कूलों के लिए कई नए दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। इसके तहत स्कूल कैंटीन और मिड-डे मील संचालित करने वाले सभी संस्थानों के लिए FSSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण) से लाइसेंस या पंजीकरण अनिवार्य होगा। इसके अलावा हर स्कूल में फूड सेफ्टी बोर्ड प्रदर्शित करना और एक फूड सेफ्टी सुपरवाइजर नियुक्त करना भी जरूरी होगा।
नए आदेश के अनुसार स्कूलों में परोसे जाने वाले भोजन की नियमित जांच की जाएगी। यदि किसी स्कूल में पोषण संबंधी मानकों या खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। FDA ने यह भी स्पष्ट किया है कि मिड-डे मील योजना के तहत बच्चों को केवल पौष्टिक और निर्धारित मानकों के अनुरूप भोजन ही उपलब्ध कराया जाएगा।
HFSS खाद्य पदार्थ वे माने जाते हैं जिनमें वसा, चीनी या नमक की मात्रा अधिक होती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे खाद्य पदार्थों का नियमित सेवन बच्चों में मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है। इसी कारण स्कूलों के आसपास इनके सेवन और बिक्री को नियंत्रित करने की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी।
FDA का कहना है कि इस अभियान के तहत स्कूलों के आसपास संचालित दुकानों और खाद्य विक्रेताओं की भी निगरानी की जाएगी। यदि कोई विक्रेता प्रतिबंधित क्षेत्र में HFSS उत्पाद बेचता पाया गया, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
राज्य सरकार और FDA का मानना है कि इस फैसले से स्कूलों में बच्चों को बेहतर पोषण मिलेगा और अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों की उपलब्धता कम होगी। अब सभी स्कूलों और संबंधित विक्रेताओं को नए नियमों का पालन सुनिश्चित करना होगा, क्योंकि उल्लंघन की स्थिति में सख्त कार्रवाई की जाएगी।

