14 Sep 2026, Mon

लद्दाख की खत्म हो रही झील को बचाने के लिए की गई अनोखी पहल, बेकार बह रहे पानी का होगा इस्तेमाल

लद्दाख की खूबसूरत त्सो कार झील इन दिनों तेजी से सिकुड़ रही है। कभी हजारों एकड़ में फैली यह झील अब अपने पुराने स्वरूप का एक छोटा हिस्सा रह गई है। झील को फिर से जीवंत करने के लिए अब ग्लेशियर से बेकार बहकर निकल जाने वाले पानी का इस्तेमाल करने की योजना बनाई गई है। इसके तहत रूपशो खर्नक ग्लेशियर धारा के पानी को लगभग 15 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित त्सो कार झील तक पहुंचाया जाएगा।

हर दिन 32 करोड़ लीटर पानी पहुंचाने की तैयारी

झील के पुनरुद्धार के लिए तैयार की गई योजना के तहत रूपशो खर्नक धारा से प्रतिदिन औसतन 132 क्यूसेक पानी त्सो कार झील तक पहुंचाया जाएगा। यह मात्रा करीब 320 मिलियन लीटर यानी लगभग 32 करोड़ लीटर प्रतिदिन के बराबर है।

खास बात यह है कि वर्तमान में ग्लेशियर से निकलने वाला यह पानी किसी उपयोग में नहीं आ रहा है और बहकर सिंधु नदी में चला जाता है। अब इसी पानी को नियंत्रित तरीके से झील तक पहुंचाने की कोशिश की जाएगी। इससे पानी की बर्बादी रोकने के साथ-साथ एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक जलस्रोत को भी बचाने की उम्मीद है।

एक दशक में 70 फीसदी तक सिकुड़ी झील

त्सो कार झील कभी करीब 11 हजार एकड़ क्षेत्र में फैली हुई थी। लेकिन पिछले करीब एक दशक में इसका आकार लगभग 70 फीसदी तक घट गया है। अब यह झील करीब 3,200 एकड़ क्षेत्र में सिमट गई है।

झील के लगातार सिकुड़ने से यहां का प्राकृतिक और पारिस्थितिक संतुलन भी प्रभावित हुआ है। पानी की मात्रा कम होने का असर उन जीव-जंतुओं और पक्षियों पर भी पड़ा है, जिनके लिए यह क्षेत्र महत्वपूर्ण आवास रहा है।

प्रवासी पक्षियों का भी रहा है प्रमुख ठिकाना

त्सो कार झील लद्दाख के महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि क्षेत्रों में गिनी जाती है। यह क्षेत्र प्रवासी पक्षियों के लिए लंबे समय से आकर्षण का केंद्र रहा है। खास तौर पर ब्लैक-नेक्ड क्रेन जैसे दुर्लभ पक्षियों की मौजूदगी ने इस झील को विशेष पहचान दी है।

झील का क्षेत्रफल और जलस्तर घटने के साथ यहां आने वाले पक्षियों की संख्या में भी कमी देखी गई है। ऐसे में झील में पानी की उपलब्धता बढ़ाने की योजना केवल जल संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य आसपास के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना भी है।

पहले भी पानी के इस्तेमाल से किया गया सफल प्रयास

झील को बचाने की इस पहल से पहले भी लद्दाख में ग्लेशियर के पानी का बेहतर इस्तेमाल करने की दिशा में काम किया गया है। लेह के पास सूखी जमीन की सिंचाई के लिए स्टॉक ग्लेशियर से करीब 9 करोड़ लीटर पानी इगू-फे और चुचोट गांवों की नहरों तक पहुंचाया गया था।

इस प्रयास के बाद अब त्सो कार झील के लिए इससे कहीं बड़े स्तर पर पानी पहुंचाने की योजना बनाई गई है। उम्मीद जताई जा रही है कि यदि परियोजना सफल रहती है तो झील में पानी का स्तर बढ़ेगा और उसका पुराना स्वरूप धीरे-धीरे वापस आ सकता है।

एक साल में बदल सकती है झील की तस्वीर

योजना को लेकर उम्मीद है कि ग्लेशियर के अतिरिक्त पानी को झील तक पहुंचाने से त्सो कार को करीब एक साल के भीतर अपने पुराने स्वरूप की ओर लौटने में मदद मिल सकती है। हालांकि वास्तविक बदलाव पानी की उपलब्धता, मौसम और परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।

अगर यह पहल सफल होती है तो यह लद्दाख में प्राकृतिक जलस्रोतों के संरक्षण और ग्लेशियर के पानी के बेहतर उपयोग का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकती है।

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