12 Sep 2026, Sat

कौन हैं दीपिका आनंद? जिन्हें बसपा की कमान सौंपने का मायावती ने दिया संकेत, दोनों भतीजों को पार्टी में नहीं देंगी पद

भतीजों को पार्टी में पद देने से किया इनकार

बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने अपने परिवार और पार्टी की भविष्य की जिम्मेदारियों को लेकर बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने साफ किया है कि उनके भाई आनंद कुमार के दोनों बेटों को पार्टी में किसी भी तरह की राजनीतिक जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। मायावती ने कहा कि वह अपने भतीजों से पार्टी के कामकाज में किसी तरह की मदद भी नहीं लेंगी।

मायावती का यह बयान ऐसे समय आया है, जब उनके भतीजे आकाश आनंद को पहले ही पार्टी से अलग किया जा चुका है। अब उन्होंने छोटे भतीजे ईशान आनंद को लेकर भी अपना रुख स्पष्ट कर दिया है।

ईशान आनंद को भी नहीं मिलेगी राजनीतिक जिम्मेदारी

मायावती ने कहा कि उनके भाई आनंद कुमार फिलहाल उनके साथ हैं। उन्होंने परिवार से जुड़ी परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि जरूरत पड़ने पर आनंद कुमार अपनी बेटी दीपिका आनंद की मदद ले सकते हैं। दीपिका फिलहाल कानून की पढ़ाई कर रही हैं।

मायावती ने स्पष्ट किया कि उनके भाई के दोनों बेटों को बसपा में छोटे या बड़े किसी भी पद पर राजनीतिक भूमिका नहीं दी जाएगी। इतना ही नहीं, उन्होंने भविष्य में उनके बेटों की अगली पीढ़ी को भी पार्टी की जिम्मेदारी सौंपने से इनकार किया है।

दीपिका आनंद को लेकर क्या बोलीं मायावती?

मायावती ने अपनी भतीजी दीपिका आनंद को लेकर अलग रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि अगर भविष्य में आनंद कुमार को उनकी मदद के लिए किसी परिवार के सदस्य की जरूरत पड़ती है, तो वह अपनी बेटी दीपिका की मदद ले सकते हैं।

हालांकि, दीपिका को सीधे तौर पर पार्टी की जिम्मेदारी देने की बात अभी तय नहीं है। मायावती ने संकेत दिया कि पहले उनकी ईमानदारी, वफादारी और कार्यक्षमता को देखा जाएगा। इसके बाद परिस्थितियों और जरूरत के मुताबिक उन्हें पार्टी में जिम्मेदारी दी जा सकती है।

इससे साफ है कि मायावती ने परिवार में पुरुष उत्तराधिकार के बजाय अपनी भतीजी को संभावित विकल्प के रूप में सामने रखा है।

दीपिका तैयार नहीं हुईं तो क्या होगा?

मायावती ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर दीपिका भविष्य में राजनीतिक जिम्मेदारी संभालने के लिए तैयार नहीं होती हैं, तो पार्टी के भीतर से किसी अन्य योग्य कार्यकर्ता को जिम्मेदारी दी जा सकती है।

उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में पार्टी की आम सहमति से दलित समाज से जुड़े किसी मिशनरी कार्यकर्ता को आगे लाया जा सकता है। यानी पार्टी की कमान परिवार के किसी बेटे या अगली पीढ़ी के पुरुष सदस्य को सौंपने की संभावना से उन्होंने पूरी तरह इनकार किया है।

परिवारवाद के खिलाफ बताया अपना फैसला

मायावती ने अपने फैसले को पार्टी संस्थापक कांशीराम की विचारधारा से जोड़ते हुए परिवारवाद का विरोध करने की बात कही। उन्होंने कहा कि पार्टी की जिम्मेदारी केवल परिवार के आधार पर नहीं, बल्कि ईमानदारी, निष्ठा और कार्यक्षमता को देखकर तय की जानी चाहिए।

उनके इस ऐलान को बसपा की भविष्य की राजनीति और नेतृत्व व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खास तौर पर दीपिका आनंद के नाम का सामने आना आने वाले समय में पार्टी के भीतर संभावित नेतृत्व को लेकर नई चर्चा शुरू कर सकता है।

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