नई दिल्ली: ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने एंटी पेपर लीक बिल को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। संसद में इस मुद्दे पर बोलते हुए उन्होंने सरकार की नीतियों और परीक्षा प्रणाली के प्रबंधन पर सवाल उठाए। ओवैसी ने कहा कि सरकार को सावधान हो जाना चाहिए और युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों को गंभीरता से लेना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि युवाओं में लगातार निराशा और असंतोष बढ़ता गया, तो इसके गंभीर सामाजिक परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि खराब प्रशासन और परीक्षा प्रणाली में बार-बार हो रही गड़बड़ियों से हालात बिगड़ सकते हैं।
NEET पेपर लीक का उठाया मुद्दा
ओवैसी ने अपने संबोधन में 2024 के NEET पेपर लीक मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया था, लेकिन उसकी रिपोर्ट का क्या हुआ, यह अब तक स्पष्ट नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित किया है और सरकार इन मामलों में प्रभावी जवाबदेही तय करने में विफल रही है।
उन्होंने कहा कि देश के कई युवा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में वर्षों का समय और मेहनत लगाते हैं, लेकिन पेपर लीक जैसी घटनाओं के कारण उनका विश्वास व्यवस्था से उठता जा रहा है।
कानून से नहीं लौटेगी छात्रों की जिंदगी
ओवैसी ने कहा कि केवल नया कानून बना देने, वीडियो संदेश जारी करने, अधिकारियों से इस्तीफा लेने या विशेष जांच दल (STF) बनाने से उन छात्रों की जिंदगी वापस नहीं आ सकती, जिन्होंने कथित तौर पर पेपर लीक और परीक्षा संबंधी अनियमितताओं के कारण आत्महत्या जैसा कदम उठाया।
उन्होंने कहा कि सरकार को यह समझना चाहिए कि यह केवल कानून व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य और उनके भरोसे का सवाल है।
युवाओं की नाराजगी पर जताई चिंता
AIMIM प्रमुख ने कहा कि यदि सरकार युवाओं की समस्याओं से दूरी बनाकर शासन करना चाहती है, तो यह एक गंभीर भूल होगी। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में युवा रोजगार और निष्पक्ष प्रतियोगी परीक्षाओं की उम्मीद खोते जा रहे हैं।
ओवैसी ने कहा कि वह उन छात्रों के साथ खड़े हैं जिनका भविष्य पेपर लीक जैसी घटनाओं से प्रभावित हुआ है। उन्होंने सरकार से पूछा कि बार-बार होने वाली परीक्षा संबंधी गड़बड़ियों के लिए वास्तविक जिम्मेदारी किसकी तय की जाएगी।
संसद और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर भी टिप्पणी
ओवैसी ने यह भी कहा कि यदि सरकार ऐसे हालात पैदा करती है, जहां युवाओं को अपनी बात मनवाने के लिए सड़कों पर उतरना पड़े, तो यह लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए अच्छा संकेत नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि लोग केवल विरोध प्रदर्शन को ही समाधान मानने लगेंगे, तो संसद की भूमिका कमजोर होगी।
विपक्ष ने भी सरकार को घेरा
पेपर लीक के मुद्दे पर विपक्ष के अन्य नेताओं ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था को कमजोर किया गया है और परीक्षा प्रणाली में केंद्रीकरण से समस्याएं बढ़ी हैं। उन्होंने शिक्षा बजट और परीक्षा प्रबंधन को लेकर भी सरकार से सवाल पूछे।
एंटी पेपर लीक बिल पर जारी बहस के बीच सरकार का कहना है कि नया कानून परीक्षा संबंधी अपराधों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करेगा। हालांकि विपक्ष का तर्क है कि केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और संस्थागत सुधार भी उतने ही जरूरी हैं।

