नई दिल्ली: नीट पेपर लीक और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर देशभर में हुए छात्र प्रदर्शनों पर अब राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली केरल सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है। भाजपा का दावा है कि केरल में नीट पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन करने वाले लगभग 5,000 युवाओं के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि कांग्रेस अन्य राज्यों में छात्रों के समर्थन में आवाज उठा रही है।
यह विवाद उस समय और बढ़ गया जब केरल में विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन को संबोधित एक पत्र में पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने राज्य सरकार से प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग की। इस घटनाक्रम के बाद भाजपा ने कांग्रेस पर राजनीतिक सुविधा के अनुसार अलग-अलग रुख अपनाने का आरोप लगाया।
केरल में दर्ज मामलों पर विवाद
पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने अपने पत्र में कहा कि केरल में छात्रों, युवाओं, सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों ने कथित नीट पेपर लीक के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन के समर्थन में शांतिपूर्ण प्रदर्शन किए थे। उन्होंने दावा किया कि इन प्रदर्शनों के सिलसिले में लगभग 5,000 लोगों के खिलाफ पुलिस ने मामले दर्ज किए हैं।
विजयन ने राज्य सरकार से आग्रह किया कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों को बिना शर्त वापस लिया जाए, ताकि युवाओं में गलत संदेश न जाए।
बीजेपी का कांग्रेस पर हमला
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी “दोहरे मापदंड” अपना रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासित राज्यों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई पर चुप रहती है, जबकि अन्य राज्यों में इसी मुद्दे पर सरकारों की आलोचना करती है।
पूनावाला ने कहा कि महाराष्ट्र, बिहार और असम जैसे राज्यों में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज कई मामलों को वापस लिया गया, लेकिन केरल की कांग्रेस सरकार ने हजारों युवाओं पर मुकदमे दर्ज कर दिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कांग्रेस छात्रों के आंदोलन का समर्थन करती है, तो केरल में उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों की गई।
पेपर लीक के मुद्दे पर भी घेरा
भाजपा प्रवक्ता ने यह भी कहा कि कांग्रेस लगातार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही है, लेकिन कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु और तेलंगाना जैसे राज्यों में पेपर लीक के मामलों पर वहां के शिक्षा मंत्रियों की जवाबदेही की मांग नहीं कर रही।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस का रुख सिद्धांतों पर नहीं, बल्कि राजनीतिक हितों पर आधारित है।
देशभर में हुए थे छात्र प्रदर्शन
नीट पेपर लीक के विरोध में हाल के दिनों में दिल्ली, बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, केरल और अन्य राज्यों में बड़े पैमाने पर छात्र प्रदर्शन हुए। कई जगहों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति भी बनी। कुछ स्थानों पर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया, लाठीचार्ज किया और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले भी दागे।
विपक्षी दलों ने इन कार्रवाइयों की आलोचना करते हुए कहा कि छात्रों की आवाज को दबाया जा रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए।
अब यह मुद्दा केवल नीट पेपर लीक तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि छात्रों के विरोध प्रदर्शन, पुलिस कार्रवाई और विभिन्न राज्यों में सरकारों के रवैये को लेकर राष्ट्रीय स्तर की राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।

