महिला आरक्षण बिल पर संसद में ऐतिहासिक बहस, Kiren Rijiju की विपक्ष से अपील—‘परिसीमन को बहाना न बनाएं’
नई दिल्ली: संसद में महिला आरक्षण बिल को लेकर आज लंबी और अहम बहस हो रही है, जिसे देश की राजनीति में एक ऐतिहासिक दिन के रूप में देखा जा रहा है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju ने इस मौके पर विपक्षी दलों से अपील की है कि वे परिसीमन (Delimitation) का मुद्दा उठाकर इस महत्वपूर्ण विधेयक का विरोध न करें और न ही जनता को गुमराह करें।
संसद में प्रस्तावित इस बिल के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान है। इसे लंबे समय से लंबित एक बड़े सामाजिक और राजनीतिक सुधार के रूप में देखा जा रहा है। मंत्री रिजिजू ने कहा कि यह कानून भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा।
“ऐतिहासिक दिन, सभी दल करें समर्थन”
रिजिजू ने कहा, “आज का दिन ऐतिहासिक है। यह बिल महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। मुझे विश्वास है कि सभी राजनीतिक दल इस कानून का समर्थन करेंगे और इसे पारित कराने में सहयोग देंगे।”
उन्होंने यह भी कहा कि महिला आरक्षण जैसे अहम मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए और सभी दलों को एकजुट होकर इसे पास कराना चाहिए।
परिसीमन को लेकर न फैलाएं भ्रम
संसदीय कार्य मंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ दल परिसीमन के मुद्दे को उठाकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि परिसीमन को महिला आरक्षण बिल के विरोध का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए।
रिजिजू ने कहा, “मेरी विपक्ष से अपील है कि वे अफवाहें न फैलाएं, खासकर दक्षिण भारत के राज्यों में। इस बिल को गलत तरीके से पेश करना या इसे रोकने के लिए बहाने बनाना ठीक नहीं है।”
M. K. Stalin पर साधा निशाना
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री M. K. Stalin पर टिप्पणी करते हुए रिजिजू ने कहा कि कुछ नेता इस मुद्दे पर राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों को गलत जानकारी देकर भ्रमित किया जा रहा है।
रिजिजू ने कहा, “महिलाओं के लिए आरक्षण के खिलाफ कोई नहीं है, लेकिन इसे रोकने के लिए बहाने बनाना दुर्भाग्यपूर्ण होगा। यह देश की महिलाओं के साथ अन्याय होगा।”
राज्यों को दी भरोसे की बात
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी राज्य को इस बिल से घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को समान अवसर और प्रतिनिधित्व मिलेगा।
उन्होंने कहा, “तमिलनाडु या किसी भी राज्य को चिंता करने की जरूरत नहीं है। सभी को उचित प्रतिनिधित्व दिया जाएगा और किसी के साथ अन्याय नहीं होगा।”
18 घंटे की बहस पर टिकी नजरें
महिला आरक्षण बिल पर संसद में लगभग 18 घंटे की चर्चा प्रस्तावित है, जिसमें विभिन्न दलों के नेता अपने विचार रखेंगे। इस दौरान कई संशोधन और सुझाव भी सामने आ सकते हैं।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, महिला आरक्षण बिल को लेकर संसद में माहौल गर्म है, लेकिन इसे ऐतिहासिक सहमति की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या सभी दल मिलकर इस विधेयक को पारित कर पाएंगे या नहीं।

