15 May 2026, Fri

ममता बनर्जी के कोर्ट में वकीलों की तरह गाउन पहनने पर गहराया विवाद, बार काउंसिल ने मांगा जवाब; पूछे ये सवाल

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee एक बार फिर विवादों में आ गई हैं। इस बार मामला कलकत्ता हाईकोर्ट में वकीलों जैसी यूनिफॉर्म—गाउन और बैंड—पहनकर पेश होने से जुड़ा है। इस घटना के बाद वकालत की वैधता और उनके ‘सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस’ को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

क्या है पूरा मामला?

सूत्रों के मुताबिक, ममता बनर्जी के हाईकोर्ट में वकील के तौर पर पेश होने के दौरान उनके परिधान को लेकर विवाद शुरू हुआ। कई कानूनी विशेषज्ञों ने इस बात पर सवाल उठाए कि क्या उनके पास सक्रिय वकालत करने का वैध ‘सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस’ (COP) मौजूद है या नहीं।

इस पूरे मामले के बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने हस्तक्षेप करते हुए पश्चिम बंगाल बार काउंसिल से विस्तृत जवाब मांगा है।

BCI ने क्या मांगी जानकारी?

बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने पश्चिम बंगाल बार काउंसिल से कई अहम सवालों के जवाब तलब किए हैं, जिनमें शामिल हैं—

  • ममता बनर्जी का एनरोलमेंट नंबर और उसकी तारीख क्या है
  • क्या उनका नाम अभी वकीलों के रजिस्टर में दर्ज है
  • 2011 से 2026 के बीच मुख्यमंत्री रहते हुए क्या उन्होंने अपनी वकालत स्वेच्छा से सस्पेंड की थी
  • क्या उन्होंने दोबारा प्रैक्टिस शुरू करने के लिए कोई आवेदन दिया है
  • क्या उनका सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस (COP) वर्तमान में वैध है

BCI ने स्पष्ट कहा है कि इन सभी सवालों का जवाब तय समय सीमा में दिया जाए।

रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश

BCI ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए पश्चिम बंगाल बार काउंसिल को निर्देश दिया है कि सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं और किसी भी तरह की छेड़छाड़, सुधार या बदलाव न किया जाए। काउंसिल ने 16 मई तक जवाब देने को कहा है।

वकालत को लेकर क्या हैं नियम?

कानूनी नियमों के अनुसार, केवल एलएलबी की डिग्री हासिल करना ही अदालत में पेश होने के लिए पर्याप्त नहीं होता। इसके लिए राज्य बार काउंसिल में नामांकन और ‘सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस’ जरूरी होता है।

यदि कोई व्यक्ति किसी संवैधानिक पद पर रहते हुए वकालत नहीं करता, तो उसका नामांकन अस्थायी रूप से निलंबित माना जा सकता है। पद छोड़ने के बाद दोबारा प्रैक्टिस शुरू करने के लिए नए सिरे से अनुमति लेनी होती है।

मामला क्यों बना चर्चा का विषय?

इस विवाद ने कानूनी और राजनीतिक दोनों हलकों में बहस छेड़ दी है। एक ओर जहां नियमों की व्याख्या को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इसे संवैधानिक पद और पेशेवर अधिकारों से जोड़कर देखा जा रहा है।

फिलहाल सभी की नजरें अब पश्चिम बंगाल बार काउंसिल की रिपोर्ट और BCI की आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *