Fuel Quality Checks: पेट्रोल और एथनॉल मिश्रित ईंधन की गुणवत्ता को लेकर सोशल मीडिया पर उठ रहे सवालों के बीच देश की तीन प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल पंपों की जांच तेज कर दी है। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने अपने रिटेल नेटवर्क पर हजारों औचक निरीक्षण, गुणवत्ता परीक्षण और मोबाइल लैब के माध्यम से सैंपल की जांच की है।
कंपनियों का कहना है कि ग्राहकों तक निर्धारित मानकों के अनुरूप पेट्रोल और डीजल पहुंचाना उनकी प्राथमिकता है। सोशल मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट दावों के बाद तेल कंपनियों ने अपनी जांच और निगरानी से जुड़े आंकड़े सार्वजनिक करते हुए ग्राहकों को भरोसा दिलाने की कोशिश की है।
इंडियन ऑयल ने किए करीब 10 हजार औचक निरीक्षण
देश की सबसे बड़ी सरकारी पेट्रोलियम कंपनी इंडियन ऑयल ने बताया कि उसने पिछले एक सप्ताह के दौरान देशभर में अपने रिटेल आउटलेट्स पर करीब 10 हजार औचक निरीक्षण किए हैं। इसके साथ ही 8,500 से अधिक ईंधन गुणवत्ता परीक्षण भी किए गए।
कंपनी ने गुणवत्ता मानकों के पालन की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करने के लिए सैकड़ों विशेष जांच टीमों को तैनात किया। इंडियन ऑयल ने कहा कि पेट्रोल-डीजल में मिलावट, अशुद्धि या निर्धारित मानकों के उल्लंघन के मामलों में उसकी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति है। निरीक्षण या ग्राहक की शिकायत के आधार पर अनियमितता साबित होने पर संबंधित डीलर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाती है।
भारत पेट्रोलियम ने भी तेज की जांच
भारत पेट्रोलियम ने 3 जुलाई से 13 जुलाई 2026 के बीच अपने पेट्रोल पंपों पर 932 औचक निरीक्षण किए। इसके अलावा कंपनी के क्वालिटी कंट्रोल सेल ने 111 अलग निरीक्षण किए।
भारत पेट्रोलियम के क्वालिटी एश्योरेंस विभाग ने मोबाइल लेबोरेटरी नेटवर्क के माध्यम से 50 स्थानों पर औचक सैंपलिंग और मौके पर ईंधन परीक्षण की प्रक्रिया पूरी की। कंपनी ने बताया कि जांच के दौरान मिलावट, दूषित ईंधन, गंभीर अनियमितता या गुणवत्ता नियमों के उल्लंघन का कोई मामला सामने नहीं आया।
HPCL ने एथनॉल ब्लेंडिंग पर बढ़ाई निगरानी
हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने एथनॉल मिश्रित पेट्रोल की गुणवत्ता और ब्लेंडिंग मानकों की जांच के लिए 7 जुलाई से 13 जुलाई के बीच 2,173 औचक निरीक्षण किए। इसके साथ ही 3 जुलाई से 13 जुलाई के दौरान कंपनी ने 1,385 नियमित निरीक्षण भी किए।
कंपनी के क्वालिटी एश्योरेंस सेल ने 93 अतिरिक्त औचक निरीक्षण किए और मोबाइल प्रयोगशालाओं की सहायता से 49 फ्यूल सैंपल की जांच की। HPCL के अनुसार, निगरानी अभियान में मिलावट, प्रदूषण, गंभीर अनियमितता या गुणवत्ता मानकों का उल्लंघन नहीं मिला।
E20 पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर बहस
देश में E20 यानी 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर वाहन मालिकों के बीच माइलेज और पुराने वाहनों की अनुकूलता से संबंधित चिंताएं सामने आई हैं। हालांकि, सरकार और तेल कंपनियां कहती रही हैं कि निर्धारित गुणवत्ता और वाहन अनुकूलता मानकों का पालन किया जा रहा है।
हाल में यूट्यूबर मनीष कश्यप ने दावा किया था कि E20 पेट्रोल से उनकी कार खराब हुई। बाद में सामने आई जांच संबंधी रिपोर्टों में कार के ईंधन में पानी मिलने की बात कही गई और खराबी का कारण E20 को नहीं माना गया।
तेल कंपनियों ने ग्राहकों से अपील की है कि ईंधन की गुणवत्ता से संबंधित शिकायत मिलने पर उसे संबंधित पेट्रोल पंप या कंपनी की ग्राहक सेवा के माध्यम से दर्ज कराएं और बिना पुष्टि वाले सोशल मीडिया दावों पर भरोसा न करें।

