Suvendu Adhikari ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर राज्य की राजनीति में नया अध्याय शुरू कर दिया है। कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित भव्य समारोह में राज्यपाल आर.एन. रवि ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। शुभेंदु अधिकारी के साथ बीजेपी के पांच वरिष्ठ नेताओं ने भी मंत्री पद की शपथ ली। इनमें Dilip Ghosh, Agnimitra Paul, Ashok Kirtania, Kshudiram Tudu और Nisith Pramanik शामिल हैं।
पश्चिम बंगाल में पहली बार बीजेपी की सरकार बनने के बाद यह शपथ ग्रहण समारोह काफी चर्चा में रहा। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री Narendra Modi, गृह मंत्री Amit Shah, रक्षा मंत्री Rajnath Singh समेत कई केंद्रीय मंत्री और बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री मौजूद रहे।
नई सरकार में मंत्री बने नेताओं में सबसे ज्यादा चर्चा दिलीप घोष की हो रही है। पश्चिम बंगाल बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाने वाले दिलीप घोष लंबे समय से पार्टी संगठन में अहम भूमिका निभाते रहे हैं। उनका जन्म 1 अगस्त 1964 को हुआ था और वे मेदिनीपुर लोकसभा सीट से सांसद भी रह चुके हैं। वर्ष 2019 से जून 2024 तक उन्होंने लोकसभा सदस्य के रूप में कार्य किया। संसद के दौरान उन्होंने गृह मामलों की स्थायी समिति, अनुमान समिति और विशेषाधिकार समिति जैसी कई अहम समितियों में जिम्मेदारी निभाई।
दिलीप घोष 2016 से 2019 तक पश्चिम बंगाल विधानसभा में खड़गपुर सीट से विधायक भी रहे। इसके अलावा उन्होंने 2020 से 2023 तक पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष के रूप में संगठन को मजबूत करने का काम किया। राजनीति में सक्रिय होने से पहले वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस से भी जुड़े रहे और अंडमान-निकोबार में संगठन की जिम्मेदारी संभाली।
मंत्री पद की शपथ लेने वाली अग्निमित्रा पॉल भी बीजेपी की प्रमुख महिला नेताओं में मानी जाती हैं। वह अपनी तेजतर्रार राजनीति और बेबाक बयानों के लिए जानी जाती हैं। वहीं निशीथ प्रमाणिक पहले भी केंद्र सरकार में मंत्री रह चुके हैं और युवा चेहरों में उनकी अच्छी पहचान है। खुदीराम टुडु और अशोक कीर्तनिया को भी बीजेपी संगठन में सक्रिय भूमिका निभाने का इनाम मिला है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी ने अपने मंत्रिमंडल में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश की है। नई सरकार के सामने अब कानून-व्यवस्था सुधारने, भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने, महिला सुरक्षा मजबूत करने और राज्य में विकास की रफ्तार बढ़ाने जैसी बड़ी चुनौतियां होंगी।
पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन को देश की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। लंबे समय तक सत्ता में रही तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद अब पूरे देश की नजर शुभेंदु अधिकारी सरकार के कामकाज पर टिकी हुई है।

