‘दायरा’ फिल्म और निर्मल पांडे की अनोखी उपलब्धि: पुरुष अभिनेता को मिला ‘बेस्ट एक्ट्रेस’ का अंतरराष्ट्रीय सम्मान
भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ फिल्में ऐसी रही हैं जो अपने समय से काफी आगे की सोच पेश करती हैं। 1996 में बनी फिल्म ‘दायरा’ भी उन्हीं में से एक है, जो भले ही भारत में बड़े पर्दे पर रिलीज नहीं हो सकी, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसने खूब सराहना बटोरी। इस फिल्म से जुड़ा एक ऐसा किस्सा आज भी फिल्म जगत को हैरान कर देता है, जब एक पुरुष अभिनेता को ‘बेस्ट एक्ट्रेस’ का अवॉर्ड दिया गया।
यह अभिनेता थे दिवंगत कलाकार निर्मल पांडे, जिन्होंने इस फिल्म में एक ट्रांसजेंडर किरदार निभाया था। उनके साथ सोनाली कुलकर्णी भी मुख्य भूमिका में थीं। 1997 में फ्रांस के वैलेंसिएन्स फिल्म फेस्टिवल में दोनों कलाकारों को संयुक्त रूप से सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार दिया गया। यह भारतीय सिनेमा के इतिहास में एकमात्र ऐसा मामला है जब किसी पुरुष अभिनेता को इस श्रेणी में अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिला, जिसे बाद में लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी दर्ज किया गया।
फिल्म ‘दायरा’ का निर्देशन अमोल पालेकर ने किया था। इसकी कहानी समाज की जटिल सच्चाइयों और संवेदनशील मुद्दों पर आधारित थी। फिल्म में दिखाया गया था कि किस तरह एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति और एक महिला के बीच भावनात्मक संबंध विकसित होता है। अपनी बोल्ड थीम और सामाजिक संदेश के कारण यह फिल्म उस समय काफी चर्चा में रही, लेकिन सेंसर बोर्ड की आपत्तियों और कुछ विवादित दृश्यों के कारण इसे भारत के सिनेमाघरों में रिलीज नहीं किया जा सका। बाद में इसे सीमित रूप से डीवीडी पर जारी किया गया।
निर्मल पांडे नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) से प्रशिक्षित अभिनेता थे और उन्होंने अपने करियर की शुरुआत थिएटर से की थी। 1994 में उन्होंने शेखर कपूर की फिल्म ‘बैंडिट क्वीन’ से बॉलीवुड में कदम रखा, जहां उनके अभिनय को काफी सराहा गया। इसके बाद उन्होंने ‘गॉडमदर’, ‘औजार’, ‘प्यार किया तो डरना क्या’, ‘वन 2 का 4’ और ‘हद कर दी आपने’ जैसी फिल्मों में अलग-अलग तरह के किरदार निभाकर अपनी बहुमुखी प्रतिभा साबित की।
साल 2010 में दिल का दौरा पड़ने से 47 वर्ष की उम्र में निर्मल पांडे का निधन हो गया। उनकी अंतिम फिल्म ‘लाहौर’ उनके निधन के बाद रिलीज हुई। आज भी ‘दायरा’ और उसमें उनका निभाया गया किरदार भारतीय सिनेमा में एक साहसी और ऐतिहासिक उदाहरण के रूप में याद किया जाता है, जिसने अभिनय की सीमाओं को नई परिभाषा दी।

