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मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के बाद अब देश में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार की तैयारी तेज हो गई है। केंद्र सरकार की नजर अब दिल्ली-एनसीआर पर है, जिसे भविष्य में भारत का सबसे बड़ा बुलेट ट्रेन हब बनाने की योजना पर काम किया जा रहा है। इस मेगा प्लान के तहत दिल्ली से उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और आगे पूर्वोत्तर भारत तक तेज रेल संपर्क विकसित करने की दिशा में तैयारी की जा रही है।
रेल मंत्रालय से जुड़ी जानकारी के अनुसार, दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी जैसे हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर उत्तर भारत और पूर्वी भारत के बीच यात्रा समय को काफी कम कर सकते हैं। PIB के अनुसार, दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड कॉरिडोर से दोनों शहरों के बीच यात्रा करीब 3 घंटे 50 मिनट में पूरी होने की संभावना जताई गई है। वहीं वाराणसी से पटना होते हुए सिलीगुड़ी तक प्रस्तावित कॉरिडोर से वाराणसी-सिलीगुड़ी की दूरी करीब 2 घंटे 55 मिनट में तय की जा सकेगी।
दिल्ली-वाराणसी कॉरिडोर को इस योजना की सबसे अहम कड़ी माना जा रहा है। यह रूट दिल्ली-एनसीआर से शुरू होकर नोएडा, जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट, मथुरा, आगरा, इटावा, लखनऊ, प्रयागराज और वाराणसी जैसे प्रमुख शहरों को जोड़ सकता है। इस रूट के जरिए धार्मिक पर्यटन, व्यापार, शिक्षा और औद्योगिक गतिविधियों को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।
नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी NHSRCL ने दिल्ली-वाराणसी और बेंगलुरु-चेन्नई बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के लिए डिजाइन कंसल्टेंसी से जुड़े टेंडर भी जारी किए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सात प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर कुल मिलाकर करीब 4,000 रूट किलोमीटर तक फैले हो सकते हैं। इनमें दिल्ली-वाराणसी, वाराणसी-सिलीगुड़ी, मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बेंगलुरु, हैदराबाद-चेन्नई और बेंगलुरु-चेन्नई जैसे रूट शामिल बताए गए हैं।
दिल्ली-एनसीआर में जेवर एयरपोर्ट भी इस योजना का बड़ा केंद्र बन सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन रूट पर नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास भी स्टेशन प्रस्तावित है। इससे हवाई यात्रा, मेट्रो, नमो भारत रैपिड रेल, सामान्य रेलवे और बुलेट ट्रेन की कनेक्टिविटी एक ही क्षेत्र में मिल सकती है। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली से नोएडा एयरपोर्ट तक बुलेट ट्रेन से यात्रा करीब 21 मिनट में पूरी हो सकती है।
अगर यह योजना तय समय पर आगे बढ़ती है, तो दिल्ली-एनसीआर देश के सबसे बड़े मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब के रूप में उभर सकता है। इससे यात्रियों को तेज, आरामदायक और समय बचाने वाला विकल्प मिलेगा। साथ ही, रियल एस्टेट, लॉजिस्टिक्स, पर्यटन और रोजगार के क्षेत्र में भी बड़ा असर देखने को मिल सकता है।
हालांकि, इन परियोजनाओं के लिए जमीन, तकनीकी सर्वे, DPR, पर्यावरणीय मंजूरी और वित्तीय स्वीकृति जैसे कई चरण अभी अहम होंगे। फिलहाल मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना के रूप में निर्माणाधीन है, जिसकी कुल लंबाई 508 किलोमीटर है।

