पिछले कुछ सालों में बच्चों की ग्रोथ, फिटनेस और सीखने-समझने की क्षमता को लेकर माता-पिता की चिंता बढ़ी है। बच्चों की दिनचर्या में फास्ट फूड, पैकेज्ड स्नैक्स, मीठे ड्रिंक्स और मोबाइल-टीवी का ज्यादा इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। वहीं बाहर खेलने और शारीरिक गतिविधियों का समय कम होता जा रहा है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यही बदलाव बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर बुरा असर डाल सकते हैं।
बच्चों की अच्छी पढ़ाई, बेहतर करियर और मजबूत भविष्य के लिए सिर्फ अच्छे स्कूल या कोचिंग ही काफी नहीं है। सही खानपान भी उतना ही जरूरी है। अगर बच्चे को रोजाना पर्याप्त प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम, विटामिन और मिनरल्स नहीं मिल रहे हैं, तो इसका असर उसकी लंबाई, हड्डियों, इम्यूनिटी और दिमागी विकास पर दिख सकता है। WHO के अनुसार, पोषण बच्चों के स्वास्थ्य और विकास का बेहद अहम हिस्सा है और बेहतर पोषण से बच्चे बेहतर तरीके से सीख पाते हैं।
रिसर्च में भी फास्ट फूड और बच्चों की पढ़ाई के बीच संबंध सामने आया है। एक अध्ययन में पाया गया कि जिन बच्चों में फास्ट फूड का सेवन अधिक था, उनकी पढ़ाई में प्रगति, खासकर पढ़ने और गणित जैसे विषयों में, तुलनात्मक रूप से कमजोर देखी गई। हालांकि, ऐसे अध्ययनों में यह समझना जरूरी है कि फास्ट फूड अकेला कारण नहीं होता, बल्कि नींद, घर का माहौल, फिजिकल एक्टिविटी और कुल पोषण भी बड़ी भूमिका निभाते हैं।
कुपोषण सिर्फ कम खाना खाने से नहीं होता। कई बच्चे पेट भरकर खाते हैं, लेकिन उनके खाने में पोषण की कमी होती है। चिप्स, बर्गर, पिज्जा, इंस्टेंट नूडल्स, कोल्ड ड्रिंक्स और ज्यादा मीठे पैकेज्ड फूड पेट तो भर देते हैं, लेकिन शरीर को जरूरी पोषक तत्व नहीं देते। UNICEF ने भी चेताया है कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स बच्चों में खराब डाइट क्वालिटी, मोटापा और माइक्रोन्यूट्रिएंट की कमी जैसी समस्याओं से जुड़े पाए गए हैं।
पोषण की कमी से बच्चों में आयरन की कमी, कमजोरी, थकान, ध्यान लगाने में दिक्कत, हड्डियों की कमजोरी और लंबाई रुकने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। दिमाग के विकास के लिए आयरन, आयोडीन, विटामिन B12, ओमेगा-3 फैटी एसिड और प्रोटीन बेहद जरूरी माने जाते हैं। अगर लंबे समय तक इनकी कमी बनी रहे, तो बच्चे की याददाश्त, एकाग्रता और सीखने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
भारत में ICMR-NIN की 2024 डाइटरी गाइडलाइंस में भी ज्यादा फैट, नमक, चीनी और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स का सेवन सीमित करने की सलाह दी गई है। बच्चों और किशोरों के लिए दूध-दही, दालें, अंडा, हरी सब्जियां, फल, नट्स, मोटे अनाज और नियमित फिजिकल एक्टिविटी को जरूरी बताया गया है।
पेरेंट्स को बच्चों की प्लेट में संतुलित भोजन शामिल करना चाहिए। दिन की शुरुआत हेल्दी नाश्ते से करें, टिफिन में घर का बना खाना दें और जंक फूड को रोजाना की आदत न बनने दें। साथ ही बच्चों को रोज कम से कम एक घंटा आउटडोर गेम्स या फिजिकल एक्टिविटी के लिए प्रेरित करें। सही खानपान और सक्रिय जीवनशैली ही बच्चों की ग्रोथ, दिमागी विकास और भविष्य की सफलता की असली नींव है।

