18 Aug 2026, Tue

‘दिमागी नक्सल’ पर क्यों मचा है बवाल, अपने ही बयान पर क्यों घिर गए पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम? भाजपा ने खोला मोर्चा

नई दिल्ली: ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री के भाषण में इस्तेमाल किए गए इस शब्द पर विपक्ष की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने खुद को ‘दिमागी नक्सल’ बताए जाने वाले शब्द को लेकर ऐसा बयान दिया, जिसके बाद सत्ता पक्ष के नेताओं ने कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। सोशल मीडिया से शुरू हुई यह बहस अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में बदल गई है।

प्रधानमंत्री के भाषण के बाद शुरू हुआ विवाद

दरअसल, स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले से दिए गए भाषण में प्रधानमंत्री ने देश में हिंसक नक्सलवाद के साथ-साथ वैचारिक स्तर पर नक्सली विचारधारा को बढ़ावा देने वालों को लेकर भी चिंता जताई थी। उन्होंने ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा था कि ऐसे लोगों से सावधान रहने की जरूरत है, जो देश को अराजकता की ओर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद विपक्षी खेमे से प्रतिक्रिया आने लगी। पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए खुद को ‘दिमागी नक्सल’ बताए जाने वाले शब्द से जोड़ते हुए कहा कि उन्हें इस बात पर गर्व है।

बयान के बाद बीजेपी ने किया पलटवार

चिदंबरम के बयान के बाद सत्ता पक्ष के नेताओं ने इसे लेकर कांग्रेस पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने किसी विपक्षी नेता का नाम लेकर उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ नहीं कहा था। उनके मुताबिक, यह शब्द उन लोगों के लिए इस्तेमाल किया गया था जो संविधान में विश्वास नहीं रखते और देश में अलगाववादी या माओवादी विचारों का समर्थन करते हैं।

सत्ता पक्ष की ओर से यह भी सवाल उठाया गया कि आखिर विपक्षी नेता इस शब्द को अपने ऊपर क्यों ले रहे हैं। बीजेपी नेताओं का आरोप है कि कांग्रेस का एक वर्ग नक्सली विचारधारा के प्रति नरम रवैया रखता रहा है।

पूर्व गृह मंत्री के बयान पर उठे सवाल

असम के मुख्यमंत्री ने भी पूर्व गृह मंत्री के बयान पर सवाल उठाते हुए उनके कार्यकाल से जुड़े नक्सलवाद विरोधी अभियान का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि अगर पूर्व गृह मंत्री खुद को ‘दिमागी नक्सल’ कह रहे हैं, तो उनके कार्यकाल के दौरान नक्सलवाद से निपटने के लिए अपनाई गई रणनीति और सुरक्षा अभियानों की भी समीक्षा होनी चाहिए।

वहीं, बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने लंबे समय तक नक्सलवाद को लेकर नरम रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार की नीतियों के कारण देश में नक्सलवाद के खिलाफ अभियान को मजबूती मिली है और अब इसके कमजोर पड़ने से विपक्ष परेशान है।

विपक्ष के कई नेताओं ने शब्द को लेकर जताई आपत्ति

‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर विपक्ष के कई नेताओं ने सवाल उठाए हैं। विपक्ष का कहना है कि सरकार को असहमति की आवाजों को नक्सलवाद से जोड़ने से बचना चाहिए। विपक्षी नेताओं के मुताबिक लोकतंत्र में सरकार की नीतियों की आलोचना करना संवैधानिक अधिकार है और इसे राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए।

इस पूरे विवाद के बीच सोशल मीडिया पर भी दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच तीखी बहस देखने को मिल रही है। एक तरफ सत्ता पक्ष इसे नक्सली विचारधारा के खिलाफ चेतावनी बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने वाला बयान बता रहा है।

आगे और बढ़ सकता है विवाद

‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर शुरू हुआ यह राजनीतिक विवाद फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है। पूर्व गृह मंत्री के बयान के बाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। आने वाले दिनों में संसद और राजनीतिक मंचों पर भी यह मुद्दा उठ सकता है। फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं और इस बयान ने देश की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

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