नई दिल्ली: भारत और चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद और कूटनीतिक तनाव के बीच रिश्तों में नरमी के संकेत दिखाई दे रहे हैं। भारत में नियुक्त चीन के नए डिफेंस अटैची रियर एडमिरल यू जियान ने भारतीय सेना और भारतीय नौसेना की सराहना करते हुए कहा कि चीन कभी नहीं भूलेगा कि पिछले वर्ष केरल तट के पास दुर्घटनाग्रस्त हुए एक कार्गो जहाज से 12 चीनी चालक दल के सदस्यों को भारतीय बलों ने सुरक्षित बचाया था। उन्होंने इसे मानवीय सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए दोनों देशों के बीच सैन्य संवाद और आपसी विश्वास बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
रियर एडमिरल यू जियान ने यह टिप्पणी मंगलवार को चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की स्थापना की 99वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित एक समारोह में की। उन्होंने कहा कि भारत और चीन एशिया की दो प्रमुख शक्तियां हैं और दोनों देश इस समय विकास, आर्थिक प्रगति और राष्ट्रीय पुनर्निर्माण के महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं। ऐसे समय में दोनों देशों के बीच सहयोग और संवाद को मजबूत करना क्षेत्रीय स्थिरता के लिए आवश्यक है।
अपने संबोधन में उन्होंने पिछले वर्ष हुई समुद्री दुर्घटना का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जून 2025 में केरल तट के पास एक मालवाहक जहाज में आग लगने और विस्फोट होने के बाद भारतीय सेना और भारतीय नौसेना ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जहाज पर मौजूद 12 चीनी नाविकों को सुरक्षित बाहर निकाला। यू जियान ने कहा कि यह मानवीय सहायता दोनों देशों के बीच विश्वास का प्रतीक है और चीन इस सहयोग के लिए भारत का हमेशा आभारी रहेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत और चीन के बीच मौजूद मतभेदों को बातचीत और आपसी समझ से सुलझाया जा सकता है। उनके अनुसार, दोनों देशों के साझा हित सीमा विवाद या अन्य मतभेदों की तुलना में कहीं अधिक व्यापक और महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की सेनाओं ने संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है और कई मौकों पर वैश्विक शांति बनाए रखने के लिए मिलकर काम किया है।
रियर एडमिरल यू जियान ने उम्मीद जताई कि दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के रणनीतिक मार्गदर्शन में भारत-चीन संबंध सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ते रहेंगे। उन्होंने कहा कि सैन्य स्तर पर नियमित संवाद, पारदर्शिता और विश्वास निर्माण से दोनों देशों के बीच बेहतर समझ विकसित होगी और क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता को मजबूती मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के महीनों में भारत और चीन के बीच राजनयिक और सैन्य स्तर पर बातचीत में तेजी आई है। सीमा क्षेत्रों में तनाव कम करने, सैन्य संवाद बढ़ाने और व्यापारिक संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में दोनों देश लगातार प्रयास कर रहे हैं। ऐसे समय में चीन के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी का यह सार्वजनिक बयान दोनों देशों के रिश्तों में सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि सीमा विवाद जैसे मुद्दे अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं, लेकिन दोनों देशों की ओर से संवाद बनाए रखने और सहयोग बढ़ाने की इच्छा भविष्य के संबंधों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारत द्वारा संकट की घड़ी में चीनी नाविकों की जान बचाना और चीन की ओर से सार्वजनिक रूप से उसके लिए आभार व्यक्त करना यह दर्शाता है कि मानवीय सहयोग राजनीतिक मतभेदों से ऊपर हो सकता है।
कूटनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि दोनों देश इसी तरह आपसी विश्वास, संवाद और सहयोग को प्राथमिकता देते हैं, तो आने वाले समय में भारत-चीन संबंधों में और सुधार देखने को मिल सकता है। फिलहाल, चीनी डिफेंस अटैची का यह बयान दोनों देशों के बीच रिश्तों को नई दिशा देने वाला सकारात्मक संदेश माना जा रहा है।

