मध्य-पूर्व में तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। ईरान ने दावा किया है कि उसके दो प्रमुख ऊर्जा संयंत्रों पर हवाई हमले किए गए हैं। हालांकि इन हमलों की जिम्मेदारी अब तक न तो अमेरिका ने ली है और न ही इजरायल ने, जिससे क्षेत्र में अनिश्चितता और गहरा गई है।
दो ऊर्जा संयंत्रों को बनाया गया निशाना
ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी, जो इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के करीब मानी जाती है, ने मंगलवार तड़के यह रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट के मुताबिक, पहला हमला इस्फ़हान में प्राकृतिक गैस से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुआ, जबकि दूसरा हमला खोर्रमशहर स्थित बिजली संयंत्र के लिए गैस पाइपलाइन पर किया गया।
हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इन ऊर्जा संयंत्रों को सीधे तौर पर निशाना बनाया गया था या फिर आसपास के अन्य ठिकानों पर हुए हमलों के कारण इन्हें नुकसान पहुंचा। घटनास्थल से सामने आई शुरुआती जानकारी में सीमित नुकसान की बात कही जा रही है, लेकिन आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।
ट्रंप के बयान और बढ़ा विवाद
इस घटनाक्रम से पहले डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य को 48 घंटे के भीतर पूरी तरह नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान के ऊर्जा ढांचे पर हमला कर सकता है। बाद में उन्होंने इस समयसीमा को बढ़ाकर पांच दिन कर दिया था और यह भी दावा किया था कि उनकी ईरान के एक “सम्मानित नेता” से बातचीत चल रही है।
हालांकि ईरान ने ट्रंप के इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया। ईरानी अधिकारियों ने कहा कि ऐसी कोई बातचीत नहीं हो रही है और ट्रंप “फेक न्यूज” फैला रहे हैं।
जिम्मेदारी को लेकर सस्पेंस
हमलों के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि इसके पीछे कौन है। अमेरिका और इजरायल दोनों ने ही इस घटना पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। यह भी ध्यान देने वाली बात है कि कई बार ऐसे हमलों की जिम्मेदारी तुरंत स्वीकार नहीं की जाती, जिससे स्थिति और जटिल हो जाती है।
वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर
इन हमलों का असर सिर्फ क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार का तनाव या बाधा अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों को प्रभावित कर सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्थिति और बिगड़ती है, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। पहले से ही भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति की अनिश्चितता के चलते ऊर्जा बाजार दबाव में है।
निष्कर्ष
ईरान में ऊर्जा संयंत्रों पर कथित हमलों और डोनाल्ड ट्रंप के सख्त बयानों ने मध्य-पूर्व की स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। फिलहाल स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि इन हमलों के पीछे कौन है और इसका वैश्विक राजनीति व अर्थव्यवस्था पर कितना बड़ा असर पड़ता है।

