12 Sep 2026, Sat

हूती विद्रोहियों ने Bab el-Mandeb Strait के मयून द्वीप पर जमाया कब्जा, दुनिया के 12% व्यापार पर मंडराया खतरा! जानिए कैसे

लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ने वाले रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ गया है। इस जलमार्ग के बीच स्थित अहम मयून द्वीप पर हूती विद्रोहियों के कब्जे की खबर सामने आई है। मयून को पेरिम द्वीप के नाम से भी जाना जाता है। इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है, क्योंकि इस जलमार्ग से दुनिया के कुल व्यापार का करीब 12 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है।

मयून द्वीप पर नियंत्रण हासिल करना हूती विद्रोहियों के लिए रणनीतिक रूप से बड़ी कामयाबी माना जा रहा है। यह द्वीप समुद्री रास्ते पर नजर रखने और यहां से गुजरने वाले जहाजों की गतिविधियों पर प्रभाव डालने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।

यमन की सेना के पीछे हटने के बाद कब्जा

यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी के मुताबिक, सरकारी सैनिक गुरुवार को मयून द्वीप से पीछे हट गए थे। इसके बाद ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने द्वीप पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया।

एक हूती अधिकारी ने भी द्वीप पर विद्रोहियों की मौजूदगी की पुष्टि की है। अधिकारियों ने सुरक्षा कारणों से अपनी पहचान सार्वजनिक नहीं की। बताया गया है कि मयून द्वीप यमन के पश्चिमी तट से करीब 3.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

द्वीप की भौगोलिक स्थिति इसे बेहद महत्वपूर्ण बनाती है। यहां से बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के समुद्री यातायात पर नजर रखना आसान होता है। यही वजह है कि इस क्षेत्र में किसी भी सशस्त्र समूह का नियंत्रण वैश्विक व्यापार के लिए चिंता का विषय बन सकता है।

दुनिया के व्यापार के लिए क्यों अहम है बाब-अल-मंदेब?

बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य लाल सागर को अदन की खाड़ी और आगे हिंद महासागर से जोड़ता है। एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व के बीच समुद्री व्यापार के लिए यह प्रमुख मार्गों में शामिल है।

इस रास्ते से बड़ी संख्या में मालवाहक जहाज, तेल और अन्य ऊर्जा उत्पादों की खेप गुजरती हैं। ऐसे में अगर यहां जहाजों की आवाजाही बाधित होती है तो इसका असर केवल आसपास के देशों पर नहीं, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन पर भी पड़ सकता है।

वर्तमान परिस्थितियों में यह जलमार्ग और भी महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि क्षेत्र में जारी संघर्ष के कारण दूसरे प्रमुख समुद्री मार्गों पर भी दबाव बढ़ा हुआ है।

सऊदी अरब से संघर्ष के बीच बढ़ी चिंता

हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच जारी तनाव के बीच मयून द्वीप पर उनका कब्जा क्षेत्रीय समीकरण को प्रभावित कर सकता है। हूती पक्ष का कहना है कि उनकी सैन्य गतिविधियां सऊदी अरब से जुड़े लक्ष्यों को निशाना बनाने की रणनीति का हिस्सा हैं।

मयून पर नियंत्रण के बाद अब सबसे बड़ी चिंता समुद्री जहाजों की सुरक्षा को लेकर है। यदि इस रणनीतिक जलमार्ग में तनाव और बढ़ता है, तो जहाजों को वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ सकता है। इससे यात्रा का समय और परिवहन लागत दोनों बढ़ सकते हैं।

फिलहाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस घटनाक्रम पर नजर रखी जा रही है। आने वाले दिनों में मयून द्वीप पर हूती विद्रोहियों का नियंत्रण किस तरह क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री व्यापार को प्रभावित करता है, यह महत्वपूर्ण होगा।

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