अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने को लेकर लगातार चर्चा के बीच ब्रिक्स देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नरों की बैठक के बाद संयुक्त बयान जारी किया गया। इस बयान में ब्रिक्स की साझा मुद्रा बनाने या अमेरिकी डॉलर को अंतरराष्ट्रीय कारोबार से हटाने का कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं रखा गया है। इसके बजाय सदस्य देशों ने स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और निवेश बढ़ाने तथा सीमा पार भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया है।
साझा मुद्रा को लेकर कोई फैसला नहीं
ब्रिक्स के संयुक्त बयान में किसी साझा मुद्रा की शुरुआत का उल्लेख नहीं है। इसी तरह अमेरिकी डॉलर को मौजूदा अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था से बाहर करने की भी कोई औपचारिक अपील नहीं की गई। बैठक में व्यावहारिक स्तर पर ऐसे विकल्पों पर जोर दिया गया, जिनसे सदस्य देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में लेनदेन को बढ़ावा दिया जा सके।
बयान में भुगतान प्रणालियों को आपस में जोड़ने और अलग-अलग देशों के बीच वित्तीय लेनदेन को आसान बनाने की दिशा में सहयोग की बात कही गई है। यह सहयोग स्वैच्छिक आधार पर आगे बढ़ाने और प्रत्येक सदस्य देश की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं का सम्मान करने पर भी जोर दिया गया।
सीमा पार भुगतान को आसान बनाने की कोशिश
ब्रिक्स पेमेंट टास्क फोर्स की ओर से सीमा पार भुगतान व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों पर भी चर्चा हुई। सदस्य देशों के बीच ऐसे व्यावहारिक समाधान तलाशने की बात कही गई है, जिनसे अंतरराष्ट्रीय भुगतान तेज और कम खर्चीले हो सकें।
इसके साथ ही भुगतान प्रणाली को अधिक सुलभ, पारदर्शी, सुरक्षित और प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया गया। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच कारोबार के दौरान भुगतान से जुड़ी जटिलताओं को कम करना है।
राष्ट्रीय मुद्राओं के इस्तेमाल पर जोर
ब्रिक्स बिजनेस फोरम में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने सदस्य देशों के बीच राष्ट्रीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में कुछ सीमित मुद्राओं पर अधिक निर्भरता आर्थिक और राजनीतिक झटकों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ा सकती है।
उन्होंने न्यू डेवलपमेंट बैंक के माध्यम से ऐसे लेनदेन को बढ़ावा देने की भी वकालत की, जिनसे सदस्य देशों के बीच कारोबार में डॉलर पर निर्भरता कम की जा सके।
वैश्विक अर्थव्यवस्था में ब्रिक्स की भूमिका बढ़ाने पर जोर
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी ब्रिक्स को वैश्विक आर्थिक विकास के लिए मजबूत मंच बनाने की जरूरत बताई। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित करने वाले प्रतिबंधों और दूसरे आर्थिक उपायों का जिक्र करते हुए संगठन की भूमिका को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया।
इस पूरी कवायद से साफ है कि ब्रिक्स देश फिलहाल किसी साझा मुद्रा को लागू करने के बजाय स्थानीय मुद्राओं में व्यापार, निवेश और भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इससे सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने और सीमा पार लेनदेन को अधिक सुगम बनाने की कोशिश की जा रही है।

