शेयर बाजार में गिरावट: सेंसेक्स 160 अंक टूटा, रुपये की कमजोरी और बिकवाली से दबाव
भारतीय शेयर बाजार में कारोबारी सप्ताह के आखिरी दिन गिरावट देखने को मिली। रुपये की ऐतिहासिक कमजोरी और विभिन्न सेक्टरों में भारी बिकवाली के दबाव के कारण बाजार लाल निशान में बंद हुआ। दिनभर उतार-चढ़ाव के बीच प्रमुख सूचकांक नीचे आ गए।
कारोबार के अंत में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 160.73 अंक या 0.21% की गिरावट के साथ 75,237.99 पर बंद हुआ। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 46.10 अंक या 0.19% टूटकर 23,643.50 के स्तर पर बंद हुआ। पूरे सत्र के दौरान बाजार में अस्थिरता बनी रही।
रुपये की कमजोरी का सीधा असर
बाजार पर दबाव की सबसे बड़ी वजह भारतीय रुपये का कमजोर होना रहा, जो डॉलर के मुकाबले 96 के पार पहुंच गया और अब तक के सबसे निचले स्तर पर आ गया। रुपये की इस गिरावट ने विदेशी निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया, जिससे बिकवाली तेज हो गई।
विशेषज्ञों के अनुसार, कमजोर रुपया न सिर्फ विदेशी निवेश को प्रभावित करता है, बल्कि आयात महंगा होने से महंगाई बढ़ने की आशंका भी पैदा करता है, जिसका सीधा असर शेयर बाजार पर पड़ता है।
सेक्टरवार प्रदर्शन मिला-जुला रहा
हालांकि बाजार में गिरावट रही, लेकिन कुछ सेक्टरों ने मजबूती दिखाकर नुकसान को सीमित किया।
आईटी सेक्टर सबसे मजबूत रहा क्योंकि रुपये की कमजोरी से आईटी कंपनियों की डॉलर कमाई का मूल्य बढ़ जाता है। इसी कारण निफ्टी आईटी इंडेक्स 1.3% की बढ़त के साथ बंद हुआ। मीडिया सेक्टर ने भी लगभग 2% की मजबूती दर्ज की।
इसके विपरीत बैंकिंग, मेटल और रियल्टी सेक्टर में भारी गिरावट देखने को मिली। निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स 1.8% टूट गया, जबकि रियल्टी और तेल-गैस सेक्टर में भी 1.5% से अधिक की गिरावट रही। मेटल सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में रहा, जहां टाटा स्टील, हिंडाल्को और जेएसडब्ल्यू स्टील जैसे शेयरों में गिरावट के चलते इंडेक्स 1.93% टूट गया।
बाजार में गिरावट की वजह क्या रही?
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि डॉलर की मजबूती और रुपये की कमजोरी के चलते कच्चे तेल का आयात महंगा हो गया है। इससे महंगाई बढ़ने की आशंका ने निवेशकों को सतर्क कर दिया और उन्होंने मुनाफावसूली शुरू कर दी।
इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली ने भी बाजार की धारणा को कमजोर किया। हालांकि आईटी सेक्टर की मजबूती ने बाजार को और बड़ी गिरावट से बचा लिया।
आगे क्या?
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा रुपये की स्थिरता, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक संकेतों पर निर्भर करेगी। अगर विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी रहती है तो बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

